छत्तीसगढ़ का 25वां स्थापना दिवस इस बार महज़ एक समारोह नहीं, बल्कि हजारों धड़कनों का जश्न बनने जा रहा है। नवा रायपुर स्थित सत्य साई संजीवनी अस्पताल वो स्थान बन गया है, जहां कभी जिंदगी और मौत से लड़ते नन्हें दिल – आज मुस्कुराहट के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने तैयार हैं।
इस अस्पताल की खूबी यह है कि यहां ना कैश काउंटर है, ना फीस की पर्ची। सिर्फ सेवा… सिर्फ दिल से दिल तक का रिश्ता। यही वजह है कि एक ही मंच पर 1,758 बच्चे – जिनकी मुफ्त हृदय सर्जरी यहीं हुई – आज दुनिया को एक नई उम्मीद का संदेश देने जा रहे हैं।
इन्हीं बच्चों में हरियाणा की 10 वर्षीय दीक्षिता भी शामिल है। कभी 105 दिन तक वेंटिलेटर पर रही यह बच्ची आज कराटे की गोल्ड मेडलिस्ट है। दीक्षिता कहती है – “जब मैं बड़ी होऊंगी तो कार्डियोलॉजिस्ट बनकर बच्चों का इलाज करूंगी, जैसे किसी ने मेरा किया।” उसके दिल में प्रधानमंत्री मोदी के लिए एक भाषण भी तैयार है।
दूसरी ओर झारखंड के धनबाद से आया कर्तव्य… कभी सांस लेने के लिए संघर्ष करता था। आज वही बच्चा पीएम मोदी को अपनी लिखी कविता सुनाने वाला है। उसकी मां भावुक होकर कहती हैं – “पहले लगा मुफ्त इलाज मतलब ठीक इलाज नहीं होगा, लेकिन यहां तो सिर्फ सेवा का धर्म निभाया जाता है।”
अस्पताल ने एक और इतिहास रचा – 1,758 ऑपरेटेड बच्चों को एक साथ मंच पर लाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, जिसकी घोषणा इंडियन क्रिकेट टीम के दिग्गज सुनील गावस्कर की मौजूदगी में की गई।
2012 से अब तक यह अस्पताल 37,500 से ज्यादा बच्चों की हार्ट सर्जरी बिना एक रुपए लिए कर चुका है और 3 लाख 80 हजार बच्चे ओपीडी में इलाज पा चुके हैं।
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव का पहला कार्यक्रम अब इसी ‘दिल वाले अस्पताल’ से शुरू होगा। प्रधानमंत्री मोदी यहां उन बच्चों को “गिफ्ट ऑफ लाइफ” सर्टिफिकेट देंगे—जिनकी धड़कनों ने हार नहीं मानी, और जिनकी मुस्कान अब इस धरती की नई पहचान है।