रतन टाटा के करीबी रहे और टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी रह चुके मेहली मिस्त्री को हटाए जाने के बाद अब मामला कानूनी मोड़ ले चुका है। मेहली मिस्त्री ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के पास केविएट (Caveat Petition) दाखिल कर दी है, यानी ट्रस्ट्स अगर उनके खिलाफ कोई कदम उठाएंगे तो उससे पहले उन्हें सुना जाए।
मामला आखिर है क्या?
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मेहली मिस्त्री को 2022 में सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट का ट्रस्टी बनाया गया था।
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उनका कार्यकाल 28 अक्टूबर 2025 को खत्म हुआ।
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ट्रस्ट बोर्ड ने इन्हें “लाइफटाइम ट्रस्टी” बनाने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने इसके खिलाफ वोट किया।
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बहुमत में विरोध होने के कारण मेहली का टर्म रिन्यू नहीं हुआ।
अब मेहली का कहना है – 17 अक्टूबर 2024 को पास हुआ रेजोल्यूशन कहता है कि ट्रस्टी का कार्यकाल खत्म होने पर उसका कार्यकाल ऑटोमैटिकली रिन्यू होगा। इसी आधार पर उन्होंने कानूनी रूप से सुनवाई की मांग की है।
⚖️ केविएट क्यों डाली गई?
✅ ताकि ट्रस्ट्स अगर चैरिटी कमिश्नर के पास बदलाव की रिपोर्ट दें
✅ या किसी नए ट्रस्टी की नियुक्ति करें
तो उससे पहले उन्हें भी अपना पक्ष रखने का मौका मिले।
कानून के अनुसार, ट्रस्ट्स को 90 दिन के भीतर बदलाव की रिपोर्ट देनी होती है। मेहली ने पहले ही कानूनी ढाल संभाल ली है।
️ कौन किसके साथ?
| नाम | पक्ष |
|---|---|
| नोएल टाटा (चेयरमैन) | मेहली के खिलाफ |
| वेणु श्रीनिवासन, विजय सिंह | विरोध में |
| डेरियस खंबाटा, प्रमित झवेरी | मेहली के समर्थन में |
| जिमी टाटा | वोटिंग से दूर रहे |
| रतन टाटा की सौतेली बहनें | मेहली के सपोर्ट में – कहा “ये बदले की कार्रवाई है” |
क्यों है ये मामला इतना संवेदनशील?
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टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा सन्स में 66% शेयर हैं।
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मतलब — ट्रस्ट के बोर्ड में बदलाव का असर सीधा पूरे टाटा ग्रुप की कमान पर पड़ता है।
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मेहली न सिर्फ रतन टाटा के बेहद करीब थे, बल्कि उनकी वसीयत (Will) के एग्जीक्यूटर भी हैं।
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दिलचस्प बात – नोएल टाटा की पत्नी आलू मिस्त्री, मेहली की कजिन हैं। यानी मामला सिर्फ कॉर्पोरेट नहीं, पारसी परिवार के भीतर की राजनीति भी है।