रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में लॉजिस्टिक हब और पार्कों को उद्योग का दर्जा दे दिया है। इसके साथ ही ‘छत्तीसगढ़ राज्य लॉजिस्टिक हब नीति 2025’ भी जारी कर दी गई है। नई नीति के तहत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रोत्साहन और अनुदान योजनाएं शामिल की गई हैं।
बस्तर और सरगुजा संभाग को अतिरिक्त लाभ
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लॉजिस्टिक पार्क या हब अगर बस्तर या सरगुजा में स्थापित किए जाते हैं, तो उन्हें 10% अतिरिक्त अनुदान मिलेगा।
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अनुदान की अधिकतम सीमा सामान्य से 10% अधिक रखी गई है।
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यदि केंद्र सरकार से मंजूर अनुदान राज्य सरकार के अनुदान से अधिक है, तो राज्य की ओर से अलग से लागत अनुदान नहीं मिलेगा।
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अगर केंद्र का अनुदान कम है, तो शेष अंतर की राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी।
इन प्रोत्साहनों का लाभ मिलेगा
✅ स्टाम्प शुल्क पर 100% छूट
✅ भूमि पंजीयन शुल्क पर 50% रियायत
✅ भू-पुनर्निर्धारण (डायवर्सन शुल्क) में पूर्ण छूट
✅ ये छूटें तय अधिसूचनाओं और विभागीय नियमों के अनुसार लागू होंगी।
कौन कर सकता है आवेदन?
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व्यक्तिगत आवेदक, साझेदारी फर्म, कंपनियां, एलएलपी, राज्य के एफपीओ, शेल्फ हेल्प ग्रुप्स सभी आवेदन कर सकते हैं।
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केवल स्वीकृत आवेदनकर्ताओं को ही योजना का लाभ मिलेगा।
सड़कों और भूमि से जुड़ी ज़रूरी शर्तें
| परियोजना का प्रकार | क्षेत्रफल | न्यूनतम एप्रोच रोड चौड़ाई |
|---|---|---|
| लॉजिस्टिक पार्क | 15–75 एकड़ | 12 मीटर |
| लॉजिस्टिक पार्क | 75 एकड़ से अधिक | 18 मीटर |
| हब/मल्टी मोडल आदि | 5–10 एकड़ | 10 मीटर |
| हब/मल्टी मोडल आदि | 10–50 एकड़ | 12 मीटर |
| हब/मल्टी मोडल आदि | 50+ एकड़ | 18 मीटर |
परियोजना स्थापना के नियम
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परियोजना के लिए भूमि का कानूनी रूप से अधिग्रहण या आबंटन होना आवश्यक।
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सभी अनुमतियां, एनओसी और तकनीकी स्वीकृतियां संबंधित विभागों से प्राप्त करना अनिवार्य।
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कुल भूमि का 60% मुख्य उपयोग (लॉजिस्टिक/वेयरहाउस कार्य) में लगाना आवश्यक है।
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शेष 40% क्षेत्र का उपयोग सहायक सुविधाओं जैसे—कमर्शियल स्पेस, लेबर क्वार्टर, एटीएम, सीवरेज सिस्टम आदि के लिए किया जा सकता है।
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स्वीकृति मिलने के बाद तय समय के भीतर प्रोजेक्ट पूरा करना होगा। ज़रूरत पड़ने पर उद्योग विभाग दो बार 12-12 महीने की अतिरिक्त अवधि दे सकता है।
✅ संक्षेप में – यह नीति क्यों खास है?
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लॉजिस्टिक को उद्योग का दर्जा देकर सरकार ने निवेश को नई दिशा दी है।
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बस्तर और सरगुजा जैसे पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
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परिवहन, वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी।