भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही के नतीजों के साथ एक बार फिर अपने मजबूत प्रदर्शन का सबूत दिया है। कंपनी का शुद्ध मुनाफा 32 प्रतिशत की बढ़त के साथ 10,053.39 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 7,620 करोड़ रुपये था। यानी निवेशकों और पॉलिसीधारकों—दोनों के लिए यह तिमाही खुशखबरी लेकर आई है।
शुद्ध मुनाफे के साथ-साथ एलआईसी की नेट प्रीमियम आय भी बढ़ी है। इस तिमाही में प्रीमियम इनकम 5.5 प्रतिशत बढ़कर 1.26 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल की 1.19 लाख करोड़ रुपये की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दिखाती है। कंपनी का सॉल्वेंसी रेशियो भी 1.98 से बढ़कर 2.13 प्रतिशत हो गया है, जो इस बात का संकेत है कि एलआईसी वित्तीय रूप से और ज्यादा मजबूत स्थिति में है तथा अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए बेहतर तरीके से सक्षम है।
एलआईसी की एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM 3.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 57.23 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। अच्छी बात यह भी रही कि पॉलिसीधारकों के फंड में नेट एनपीए घटकर 6.17 करोड़ से 3.94 करोड़ पर आ गया। हालांकि, तिमाही-दर-तिमाही तुलना करें तो मुनाफे में हल्की गिरावट दर्ज की गई है—पिछली तिमाही में कंपनी का मुनाफा 10,957 करोड़ था।
इस अवधि में पहले वर्ष का प्रीमियम 10,884 करोड़ रुपये रहा जबकि पिछली तिमाही में यह 7,566 करोड़ था। रिन्यूअल प्रीमियम बढ़कर 65,320 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष के 62,236 करोड़ रुपये से ज्यादा है। सिंगल प्रीमियम भी 50,882 करोड़ रुपये दर्ज हुआ, जो सालाना आधार पर बढ़ा है, हालांकि पिछली तिमाही की तुलना में इसमें थोड़ा गिरावट देखी गई।
अगर आधे साल के प्रदर्शन की बात करें तो एलआईसी का कुल प्रॉफिट आफ्टर टैक्स यानी PAT 16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 21,040 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कुल प्रीमियम आय 5 प्रतिशत बढ़कर 2.45 लाख करोड़ रुपये हो गई। इंडिविजुअल नॉन-पार एपीई में 30.47 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई और यह 6,234 करोड़ हो गया, जबकि ग्रुप बिजनेस एपीई भी 20.3 प्रतिशत बढ़कर 29,034 करोड़ पर पहुंच गया।
कंपनी की वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस (VNB) भी 12.3 प्रतिशत बढ़ी है और यह 5,111 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि VNB मार्जिन 140 बेसिस प्वाइंट उछलकर 17.6 प्रतिशत पर पहुंच गया। खर्च कम करने की दिशा में भी एलआईसी ने बेहतर काम किया है, क्योंकि कुल खर्च अनुपात घटकर 11.28 प्रतिशत रह गया, जो कंपनी की लागत प्रबंधन क्षमता को मजबूत साबित करता है।