गुंटूर के निजी कॉलेज में फूड पॉयजनिंग का मामला, प्रशासन सख्त – समिति करेगी जांच और देगी रिपोर्ट

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गुंटूर जिले के एक निजी कॉलेज में भोजन विषाक्तता का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया है। घटना के बाद छात्रों में घबराहट का माहौल बना, जिसके चलते प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जिला कलेक्टर ए. थमीम अंसारिया ने इस संबंध में एक विशेष समिति गठित करने के आदेश दिए हैं, जो जांच के बाद विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी।

तेनाली की उपजिलाधिकारी वी. संजना सिम्हा ने बताया कि प्रशासनिक टीम कॉलेज परिसर पहुंची और वहां मौजूद मेस और किचन सुविधाओं का निरीक्षण किया गया। लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग भोजन की व्यवस्था की जांच की गई। जांच के दौरान यह भी देखा गया कि खाना बनाने की प्रक्रिया, साफ-सफाई, पानी की गुणवत्ता और खाद्य सामग्री के स्टोरेज में FSSAI के मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं। अधिकारियों ने भोजन और पानी के नमूने भी इकट्ठे कर लिए हैं, जिन्हें लैब में भेजा गया है। रिपोर्ट शुक्रवार या शनिवार तक आने की उम्मीद है।

सिम्हा के अनुसार, कॉलेज में रोजाना करीब 6,000 छात्र भोजन करते हैं, जिनमें से लगभग 50 छात्रों में 29 अक्टूबर से फूड पॉयजनिंग जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। कुछ छात्रों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि अन्य का उपचार कॉलेज परिसर में ही किया गया। प्रशासन का कहना है कि कॉलेज प्रबंधन ने शुरुआत में इस मामले को मामूली बताते हुए सिर्फ कुछ छात्रों के बीमार होने की बात कही थी, लेकिन अधिकारी इससे सहमत नहीं थे और उन्होंने पूरी स्थिति का सही ब्यौरा मांगा।

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने यह भी पाया कि संस्थान का आधा पानी राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (CRDA) से आता है और बाकी निजी टैंकरों से मंगाया जाता है। जल शुद्धिकरण प्रणाली मौजूद होने के बावजूद पानी और भोजन के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। फिलहाल फूड पॉयजनिंग के असली कारण का पता नहीं चल पाया है।

छात्रों ने अधिकारियों को यह भी बताया कि पहले भी भोजन की क्वालिटी को लेकर शिकायतें हो चुकी हैं और कुछ मौकों पर विरोध प्रदर्शन भी किए गए थे। हालात को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने अगले आदेश तक चिकन और अंडे की खरीद पर रोक लगा दी है ताकि स्थिति फिर से न बिगड़े। प्रशासन ने कॉलेज को साफ-सफाई और खाद्य भंडारण को बेहतर करने के निर्देश दिए हैं।

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