रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO अब सिर्फ एक संभावना नहीं, बल्कि भारत के कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक बनने की ओर बढ़ रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, निवेश बैंकों ने जियो की वैल्यूएशन 130 से 170 अरब डॉलर के बीच आंकी है। अगर ऊपरी दायरा सच होता है, तो जियो सीधे तौर पर भारत की टॉप तीन सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची में शामिल हो सकती है। यह वैल्यूएशन भारती एयरटेल जैसी दिग्गज कंपनियों को भी पीछे छोड़ देगा, जिसका वर्तमान मार्केट कैप लगभग 143 अरब डॉलर (12.7 लाख करोड़ रुपए) है।
कहा जा रहा है कि 2006 में रिलायंस पेट्रोलियम की लिस्टिंग के बाद यह रिलायंस ग्रुप की किसी यूनिट का पहला बड़ा IPO होगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि जियो के वैल्यूएशन पर अभी बैंकों और कंपनी के बीच अंतिम बातचीत जारी है। इससे पहले ICICI सिक्योरिटीज ने भी जियो की इक्विटी वैल्यू बढ़ाकर 148 अरब डॉलर कर दी थी, जिससे बाजार में इस IPO को लेकर उम्मीदें और बढ़ गई थीं।
मुकेश अंबानी पहले ही साफ कर चुके हैं कि जियो का आईपीओ 2026 की पहली छमाही में आ सकता है। दिलचस्प बात यह है कि 2019 से ही अंबानी इस प्रस्ताव का ज़िक्र कर रहे हैं, लेकिन अब इसका ठोस रोडमैप दिखने लगा है। जियो की मजबूती केवल तकनीक या नेटवर्क तक सीमित नहीं है—इसके पीछे 2020 में मेटा (फेसबुक), अल्फाबेट (गूगल) और कई वैश्विक दिग्गजों का 10 अरब डॉलर से अधिक का निवेश भी शामिल है।
आज की तारीख में जियो के पास लगभग 50.6 करोड़ ग्राहक हैं और प्रति यूज़र औसत राजस्व यानी ARPU 211.4 रुपए का है। यह भारतीय दूरसंचार बाजार में इसकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है। हालांकि रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से अभी तक इस वैल्यूएशन या IPO टाइमलाइन पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि यह भारत के कैपिटल मार्केट के लिए अगले दशक की सबसे बड़ी लिस्टिंग हो सकती है।
अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो जियो न सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी के रूप में बल्कि डिजिटल इकोसिस्टम की सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभरेगी—और भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा।