सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में बढ़ते आवारा कुत्तों और पशुओं के खतरे को देखते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और बस स्टैंड जैसे संवेदनशील इलाकों में अब आवारा कुत्तों की आवाजाही पूरी तरह रोकी जाए। इन परिसरों को सुरक्षित बनाने के लिए चारदीवारी या बाड़ लगाने का निर्देश दिया गया है, ताकि बच्चों, मरीजों और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी के बाद उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था। ऐसे सभी कुत्तों को स्थायी रूप से शेल्टर होम में रखा जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि पूरे देश में लागू होगा। साथ ही, सभी नेशनल और स्टेट हाईवे को भी आवारा जानवरों से मुक्त रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि सड़क हादसों में कमी लाई जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के मुख्य सचिवों को आदेश जारी करते हुए कहा है कि हर राज्य यह सुनिश्चित करे कि इन निर्देशों का पालन सख्ती से किया जाए। अदालत ने तीन हफ्ते के अंदर स्टेटस रिपोर्ट और हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि जहां-जहां कुत्ते या पशु बड़ी संख्या में देखे जाते हैं, उन सरकारी और निजी संस्थानों की पहचान अगले दो हफ्तों में कर ली जानी चाहिए और वहां सुरक्षा उपाय तुरंत शुरू हों।
यह मामला तब गंभीर रूप से उठा जब देशभर में बच्चों और बुजुर्गों पर आवारा कुत्तों के हमले बढ़ते गए, खासतौर पर दिल्ली–एनसीआर की घटनाओं की मीडिया रिपोर्ट्स सामने आईं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को स्वतः संज्ञान में लिया था और अब इसका दायरा पूरे देश में बढ़ा दिया गया है। इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने भी लगभग तीन महीने पहले ऐसा ही आदेश दिया था कि सड़कों से आवारा जानवरों को हटाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अब उस आदेश को पूरे देश में लागू कर दिया है।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कैंपस के अंदर बाड़ लगाने के बाद इनकी देखभाल और निगरानी के लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए जाएंगे। नगर निगम, नगर पालिका और पंचायतों को हर तीन महीने में इन परिसरों का निरीक्षण करना होगा। हालांकि, याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा कि यह आदेश अत्यधिक कठोर है और इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोच्च है।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश पहले दिए गए अपने ही आदेश से अलग है, जिसमें कहा गया था कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी जगह छोड़ा जा सकता है। अब कोर्ट का रुख सख्त हो चुका है—कुत्ते पकड़े जाएंगे, उनकी नसबंदी होगी और फिर उन्हें शेल्टर होम में ही रखा जाएगा।
देश में पहली बार किसी अदालत ने इतने स्पष्ट और व्यापक स्तर पर ऐसे दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनका सीधा संबंध सार्वजनिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक जिम्मेदारी से है। अब देखना होगा कि राज्यों की सरकारें और स्थानीय निकाय इसे किस गति और गंभीरता से लागू करते हैं।