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रेस्टोरेंट-स्टाइल गुड़-इमली की चटनी — घर पर बनाएं बाज़ार जैसा स्वाद

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समोसा, कचौड़ी हो या गोलगप्पे और आलू टिक्की — इन सबकी जान होती है खट्टी-मीठी गुड़-इमली की चटनी। इसका गाढ़ा रंग, मीठा-खट्टा स्वाद और हल्का सा मसालेदार ट्विस्ट किसी भी चाट को लाजवाब बना देता है। खास बात यह कि ये सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाती, बल्कि इमली और गुड़ दोनों ही पाचन के लिए फायदेमंद होते हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी चटनी वैसी ही बने जैसी बाज़ार या रेस्टोरेंट में मिलती है, तो ये तरीका आपके काम आ सकता है।

सबसे पहले इमली को आधे घंटे के लिए गुनगुने पानी में भिगो दें। जब इमली अच्छी तरह फूल जाए, तो उसे मसलकर उसका गूदा निकाल लें और बीज अलग कर दें। अब एक गहरे पैन में यह इमली का गाढ़ा गूदा डालें और उसमें कद्दूकस किया हुआ गुड़ मिलाकर धीमी आंच पर पकाना शुरू करें। लगातार चलाते रहें ताकि गुड़ नीचे चिपके या जले नहीं। कुछ ही मिनटों में गुड़ पिघलकर इमली में घुल जाएगा और मिश्रण थोड़ा गाढ़ा होने लगेगा।

अब इसमें स्वाद के अनुसार नमक, काला नमक, लाल मिर्च पाउडर और भुना जीरा पाउडर मिलाएं। अगर चाहें तो एक चुटकी सूखा अदरक पाउडर डाल दें, इससे चटनी का फ्लेवर और भी निखर जाता है। इसे मध्यम आंच पर तब तक पकने दें जब तक चटनी चमकदार और थोड़ी चिपचिपी बनावट न ले ले। ध्यान रहे कि इसे ज्यादा न पकाएं, वरना ठंडा होने पर यह बहुत ज्यादा गाढ़ी हो जाएगी।

चटनी तैयार होने के बाद इसे पूरी तरह ठंडा करें और साफ-सुथरे कांच के जार में भरकर फ्रिज में रख दें। सही तरीके से स्टोर करने पर यह 15 से 20 दिन तक एकदम ताज़ा रहती है। अगर चटनी ज्यादा गाढ़ी लगे, तो इस्तेमाल से पहले थोड़ा गुनगुना पानी मिलाकर पतली कर सकते हैं।

इसका स्वाद तभी परफेक्ट आता है, जब गुड़ और इमली का संतुलन सही हो — न ज्यादा खट्टा, न बहुत मीठा। अगर आपको हल्का खट्टापन पसंद है तो गुड़ थोड़ा कम रखें, और यदि मीठापन पसंद है तो गुड़ थोड़ा बढ़ा सकते हैं।

जब यह चटनी तैयार हो जाए, तो इसे पानीपुरी, भेलपुरी, आलू टिक्की, दही भल्ले, समोसे या यहां तक कि नाश्ते के साथ भी सॉस की तरह परोसा जा सकता है। हर डिश में इसका एक चम्मच स्वाद को सीधा दिल तक पहुंचा देता है।

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