सोनाक्षी सिन्हा और सुधीर बाबू की बहुचर्चित फिल्म ‘जटाधारा’ आखिरकार सिनेमाघरों में उतर गई है। पुरानी लोककथा पर आधारित इस डार्क फैंटेसी ड्रामा का ट्रेलर देखकर दर्शकों में उम्मीदें काफी ऊंची थीं, लेकिन थिएटर से निकलते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने जो प्रतिक्रियाएं दीं—उन्हें देखकर साफ हो गया कि फिल्म ने दर्शकों को गंभीर रूप से निराश किया है।
फिल्म के रिलीज के कुछ ही घंटों के अंदर X (पहले ट्विटर) पर लगातार रिएक्शन की झड़ी लग गई। कई यूज़र्स ने इसे “अनावश्यक ड्रामा” और “AI से लदा हुआ नकली सिनेमाई अनुभव” बताया। एक यूज़र ने तो इसे 1.5 स्टार देते हुए लिखा—“अब तक की सबसे खराब फिल्मों में से एक। सब कुछ इतना बनावटी, इतना दिखावटी! लगता है जैसे पूरे सेट और विजुअल्स किसी AI टूल से तैयार कर दिए गए हों। सोनाक्षी को स्क्रीन पर देखना टॉर्चर से कम नहीं था।”
कुछ दर्शकों ने फिल्म के संगीत और सुधीर बाबू की मेहनत की सराहना भी की, लेकिन यह भी साफ कहा कि यह मेहनत स्क्रिप्ट और एक्सीक्यूशन की कमियों को नहीं बचा पाई। अधिकांश रिव्यूज़ में ‘जटाधारा’ को “असहनीय”, “थकाऊ अनुभव” और “पूरी तरह मिसफायर” कहा गया।
इस फिल्म से सोनाक्षी सिन्हा ने तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री में डेब्यू किया है। उनका किरदार धनपिसाचिनी—एक डार्क, रहस्यमयी विलन के रूप में दिखाया गया है, लेकिन नेटिज़न्स का कहना है कि यह रोल जितना धमाकेदार हो सकता था उतना लिखा या परोसा नहीं गया। सुधीर बाबू से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन उन्हें भी “स्क्रिप्ट की कमज़ोरी का शिकार” बताया जा रहा है।
फिल्म का निर्देशन अभिषेक जायसवाल और वेंकट कल्याण ने किया है। शिल्पा शिरोडकर भी एक अहम रोल में नज़र आई हैं। हालांकि सभी स्टारकास्ट की मौजूदगी के बावजूद, कहानी की रफ़्तार और ओवर-ड्रामैटिक प्रेजेंटेशन दर्शकों को पकड़ कर नहीं रख पाया।
कुल मिलाकर सोशल मीडिया का मूड यही कह रहा है—“जटाधारा दमदार नहीं, बल्कि बेहद निराशाजनक निकली। ट्रेलर ने जितनी उम्मीद जगाई थी, फिल्म ने उतनी ही जल्दी तोड़ दी।”