दिल्ली में नवंबर की शुरुआत से तापमान लगातार गिर रहा है और सुबह की ठंडी हवा अब सर्दी की दस्तक साफ महसूस करा रही है। शनिवार को राजधानी का न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो साल के सामान्य औसत से 3 डिग्री कम है। मौसम विभाग पहले ही चेतावनी दे चुका है कि इस बार ठंड ज्यादा कड़ाके की हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने “विंटर एक्शन प्लान” तैयार कर लिया है, ताकि खास तौर पर उन लोगों को ठंड से बचाया जा सके जिनके पास रहने के लिए सुरक्षित घर नहीं है।
यह योजना 15 नवंबर से लागू होगी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि राजधानी में 197 स्थायी शेल्टर होम पहले से संचालित हैं और अब इनके अलावा 250 अतिरिक्त अस्थायी शेल्टर बनाए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि इस पहल से बेघर और कमजोर तबके के लोगों को गरिमा के साथ सुरक्षित ठिकाना मिलेगा। इन शेल्टरों की 24 घंटे ऑनलाइन मॉनिटरिंग भी की जाएगी ताकि किसी भी सुविधा की कमी न रह जाए।
योजना के तहत ये नए आश्रय स्थल 15 नवंबर से 15 मार्च तक चालू रहेंगे। इन्हें दिल्ली के लगभग 120 स्थानों पर स्थापित किया जा रहा है और इनमें करीब 2,500 लोगों के रहने की व्यवस्था होगी। जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या और क्षमता बढ़ाने की भी तैयारी है। सरकार ने इस बार इन शेल्टरों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने की बात भी कही है, जिससे इनकी वास्तविक समय पर निगरानी हो सके और सेवा बेहतर ढंग से संचालित होती रहे।
इस विंटर एक्शन प्लान को सफल बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने कई विभागों को एक साथ जोड़ा है। शहरी निकाय यानी एमसीडी, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUISB) और लोक निर्माण विभाग (PWD) को मैदान में उतारा गया है। इन्हें कंबल, गर्म कपड़े और भोजन जैसी जरूरी सामग्री का स्टॉक तैयार रखने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ-साथ मौजूदा शेल्टरों की मरम्मत और विस्तार का काम भी तेज कर दिया गया है। सार्वजनिक भवनों और बसों को भी इन्सुलेशन से लैस किया जाएगा ताकि उनमें ठंड का असर कम हो। मुख्य सड़कों पर फॉग लाइट्स लगाने की तैयारी भी की जा रही है ताकि कोहरे के दौरान दुर्घटनाओं से बचाव हो सके।
स्वास्थ्य विभाग को भी इस एक्शन प्लान का अहम हिस्सा बनाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को हाइपोथर्मिया, फ्रॉस्टबाइट और सर्दी से जुड़ी सांस की बीमारियों से निपटने के लिए प्रोटोकॉल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को ठंड से प्रभावित मरीजों के लिए बिस्तर अलग रखने, जरूरी दवाएं उपलब्ध कराने और रैपिड रिस्पांस टीमों को तैयार रखने को कहा गया है। एंबुलेंस सेवाओं को भी उन इलाकों में मजबूत बनाया जा रहा है जहां ठंड का असर ज्यादा पड़ता है।
कुल मिलाकर, दिल्ली में इस बार की ठंड सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि सरकार की तैयारियों की भी परीक्षा होगी। विंटर एक्शन प्लान के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित करने की कोशिश में है कि कोई भी व्यक्ति सड़कों पर ठंड से बेहाल न हो और सभी को सुरक्षित पनाह मिल सके।