टाटा मोटर्स की कमर्शियल व्हीकल (CV) यूनिट 12 नवंबर यानी कल स्टॉक मार्केट में अपनी अलग पहचान के साथ लिस्ट होने जा रही है। कंपनी ने अपने पैसेंजर व्हीकल (PV) और कमर्शियल व्हीकल बिजनेस को अलग-अलग इकाइयों में विभाजित किया है, ताकि दोनों क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से विकास की संभावनाओं को बढ़ाया जा सके।
डिमर्जर के तहत अब CV यूनिट का नाम टाटा मोटर्स लिमिटेड होगा, जबकि पैसेंजर व्हीकल यूनिट अब टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड (TMPVL) के नाम से शेयर बाजार में ट्रेड कर रही है। यह पुनर्गठन पिछले साल अगस्त में मंजूर किया गया था और 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हुआ।
इस बदलाव के बाद टाटा मोटर्स दो स्वतंत्र लिस्टेड कंपनियों में बंट चुकी है —
TMPVL, जिसमें पैसेंजर व्हीकल्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और जगुआर लैंड रोवर (JLR) बिजनेस शामिल हैं,
और नई टाटा मोटर्स लिमिटेड, जो कमर्शियल व्हीकल बिजनेस संभालेगी।
लिस्टिंग से पहले की मुख्य बातें:
टाटा मोटर्स के शेयरहोल्डर्स को CV यूनिट के शेयर 1:1 रेशियो में मिले हैं। यानी, अगर किसी निवेशक के पास टाटा मोटर्स का एक शेयर था, तो उसे CV यूनिट का एक शेयर फ्री में मिला है। इस डिमर्जर के तहत कुल 368.23 करोड़ शेयर शेयरधारकों को अलॉट किए गए हैं। ये शेयर पहले से उनके डीमैट अकाउंट में क्रेडिट हैं, लेकिन अब तक ट्रेडिंग बंद थी। लिस्टिंग के बाद ये शेयर मार्केट में खरीदे-बेचे जा सकेंगे।
कंपनी की पुरानी एंटिटी अब TMPVL बन चुकी है, जबकि नई CV यूनिट टाटा मोटर्स लिमिटेड के नाम से NSE और BSE पर ‘T’ ग्रुप में ट्रेड होगी। इसके शेयर की फेस वैल्यू ₹2 तय की गई है। मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि लिस्टिंग प्राइस ₹320 से ₹470 के बीच रह सकती है।
टैक्स पर बड़ा फायदा:
डिमर्जर के तहत जो नए शेयर शेयरधारकों को मिले हैं, उन पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा। टैक्स तभी लागू होगा जब निवेशक इन शेयरों को बेचेंगे। इसके अलावा, इन शेयरों की होल्डिंग अवधि वही मानी जाएगी जो पुराने टाटा मोटर्स शेयर की खरीद तारीख थी। यानी अगर किसी ने पुराने शेयर 12 महीने से ज्यादा समय तक होल्ड किए हैं, तो बिक्री पर LTCG टैक्स 12.5% (₹1.25 लाख से ऊपर के गेन पर) लगेगा।
डिमर्जर की रणनीति और उद्देश्य:
टाटा मोटर्स ने कहा है कि कमर्शियल और पैसेंजर दोनों सेगमेंट अलग-अलग ग्रोथ स्टेज पर हैं। CV यूनिट के पास भारतीय बाजार में 37% से अधिक हिस्सेदारी है और यह ट्रक, बस और कंस्ट्रक्शन व्हीकल्स जैसे सेगमेंट्स में मजबूत स्थिति रखती है। दूसरी ओर, पैसेंजर व्हीकल यूनिट इलेक्ट्रिक वाहनों, प्रीमियम SUVs और JLR जैसे ग्लोबल ब्रांड्स पर फोकस कर रही है।
कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का कहना है कि डिमर्जर के बाद दोनों कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकेंगी, जिससे कैपिटल अलोकेशन, मैनेजमेंट एफिशिएंसी और इन्वेस्टमेंट सिनर्जी बढ़ेगी। यह कदम भविष्य में EVs, ऑटोनॉमस व्हीकल्स और सॉफ्टवेयर-ड्रिवन मोबिलिटी सॉल्यूशंस के विस्तार में मदद करेगा।
आगे क्या होगा:
लिस्टिंग के बाद टाटा मोटर्स की CV यूनिट की तुलना अब अशोक लेलैंड जैसी कंपनियों से की जाएगी, जबकि पैसेंजर व्हीकल यूनिट की सीधी टक्कर मारुति सुजुकी और महिंद्रा एंड महिंद्रा से होगी। दोनों कंपनियां अपनी-अपनी डिविडेंड पॉलिसी भी अलग रखेंगी।
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि इस डिमर्जर से कंपनी की वास्तविक वैल्यू सामने आएगी और शेयरधारकों को लॉन्ग टर्म में बड़ा फायदा मिलेगा। अलग-अलग लिस्टिंग से निवेशकों को भी अब यह मौका मिलेगा कि वे अपनी पसंद और स्ट्रैटेजी के अनुसार दोनों में से किसी एक सेगमेंट में निवेश कर सकें।