अमेरिका में लंबे समय से चल रहा सरकारी शटडाउन अब आखिरकार इस हफ्ते खत्म होने की उम्मीद है। जैसे ही यह गतिरोध समाप्त होगा, निवेशकों और वॉल स्ट्रीट की निगाहें अब उस आर्थिक डेटा पर टिक गई हैं जो शटडाउन के चलते जारी नहीं हो सका था। इनमें सबसे अहम है सितंबर की रोजगार रिपोर्ट (Jobs Data) — जो फेडरल रिज़र्व की दिसंबर बैठक में ब्याज दरों (Rate Cut) पर होने वाले फैसले का अहम आधार मानी जा रही है।
फेड फिर से “डेटा-निर्भर” मोड में लौट रहा है
मॉर्गन स्टेनली के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि फेडरल रिज़र्व अब पूरी तरह डेटा-ड्रिवन पॉलिसी पर लौट आया है।
उनके अनुसार, शटडाउन खत्म होने के तीन दिन बाद जारी होने वाली सितंबर पेरोल रिपोर्ट यह दिखा सकती है कि अमेरिका में भर्ती की रफ्तार काफी धीमी हो चुकी है।
अनुमान है कि इस अवधि में सिर्फ 50,000 नई नौकरियां जुड़ेंगी, जबकि बेरोजगारी दर 4.3% के स्तर पर स्थिर रह सकती है।
लेकिन अक्टूबर और नवंबर में यह दर 4.5% या उससे अधिक तक पहुंच सकती है — इसकी वजह शटडाउन के दौरान हुए अस्थायी फर्लो (forced leave) और संघीय कर्मचारियों के बायआउट प्रोग्राम बताए जा रहे हैं।
रोजगार डेटा बनेगा फेड के फैसले की कुंजी
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के मुताबिक, शटडाउन की वजह से महंगाई, उपभोक्ता खर्च और जीडीपी ग्रोथ जैसे संकेतक फिलहाल पीछे छूट गए हैं। ऐसे में रोजगार का डेटा ही इस सर्दी में फेड के लिए सबसे बड़ा आर्थिक संकेतक साबित होगा।
अगर आने वाले रोजगार आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, तो फेड दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है।
वहीं अगर आंकड़े मजबूत आते हैं, तो रेट कट का अनुमान कमजोर पड़ जाएगा, क्योंकि फेड अब किसी खतरे से बचने के बजाय पूरी तरह डेटा-आधारित निर्णयों पर केंद्रित है।
फेड अधिकारियों में मतभेद बरकरार
फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल पहले ही साफ कर चुके हैं कि दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती पक्की नहीं है।
उनके मुताबिक, यह फैसला आने वाले हफ्तों में मिलने वाले डेटा और आर्थिक रुझानों पर निर्भर करेगा।
फेड की अक्टूबर बैठक के बाद अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आए हैं।
फेड गवर्नर स्टीफन मीरन ने जहां दिसंबर में 50 बेसिस पॉइंट्स (0.50%) की दर कटौती की वकालत की है ताकि संभावित आर्थिक सुस्ती को रोका जा सके, वहीं शिकागो फेड के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी का कहना है कि शटडाउन के चलते पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है, इसलिए नीतिगत दर पर फैसला करना अभी जल्दबाज़ी होगी।
बाजार में अनिश्चितता बरकरार
निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि शटडाउन खत्म होने के बाद आने वाला जॉब्स डेटा फेड की दिशा तय करेगा — या फिर उसे और अधिक उलझा देगा।
अगर रोजगार वृद्धि कमजोर रही तो दिसंबर में रेट कट की संभावना पक्की मानी जाएगी, लेकिन अगर आंकड़े मज़बूत आए तो फेड शायद फिर से “वेट एंड वॉच” की नीति अपनाएगा।
वॉल स्ट्रीट के विश्लेषकों का मानना है कि यह आने वाला डेटा ही दिसंबर की फेड बैठक का “डील ब्रेकर” या “डील मेकर” साबित होगा।