रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय की जांच के दायरे में आ गए हैं। विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी फेमा के तहत जारी समन के बाद अंबानी ने ईडी को पत्र लिखकर वर्चुअली पेश होने की इच्छा जताई है। 66 वर्षीय उद्योगपति की ओर से जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि वे इस जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं और एजेंसी द्वारा मांगी गई हर जानकारी उपलब्ध कराएंगे।
यह पूरा मामला जयपुर–रींगस राजमार्ग परियोजना से जुड़ी उस जांच से संबंधित है, जिसमें ईडी को संदेह है कि हवाला के जरिए लगभग 100 करोड़ रुपये विदेश भेजे गए। एजेंसी ने विभिन्न व्यक्तियों और कथित हवाला डीलरों के बयान दर्ज किए हैं, जिनके बाद अंबानी को उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। हालांकि इस बार उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पेश होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बयान देने की पेशकश की है।
हवाला उस प्रक्रिया को कहा जाता है जिसमें धन अवैध रूप से, अक्सर नकद के रूप में, देश के बाहर या भीतर भेजा जाता है। इसी तरह के संदिग्ध लेनदेन की जांच के सिलसिले में अंबानी से पहले भी पूछताछ की जा चुकी है—विशेष रूप से उस मनी लॉन्ड्रिंग केस में, जिसमें उनके समूह की कंपनियों पर करीब 17,000 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का आरोप लगा था।
रिलायंस समूह ने इस मामले को लेकर जारी अपने बयान में कहा है कि फेमा संबंधी यह जांच दरअसल साल 2010 के एक ठेके से जुड़ी है। 15 साल पुराने इस मामले में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को जयपुर–रींगस टोल रोड प्रोजेक्ट का ईपीसी अनुबंध मिला था। कंपनी का दावा है कि यह पूरी तरह घरेलू प्रोजेक्ट था और इसमें विदेशी मुद्रा से जुड़ा कोई तत्व शामिल ही नहीं था। प्रोजेक्ट समय पर पूरा हुआ और पिछले चार वर्षों से यह एनएचएआई के अधीन है।
रिलायंस ने यह भी स्पष्ट किया कि अनिल अंबानी इस कंपनी के दैनिक प्रबंधन में कभी शामिल नहीं रहे। वे अप्रैल 2007 से मार्च 2022 तक एक गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में जुड़े थे, यानी बोर्ड का हिस्सा होते हुए भी कंपनी के रोज़मर्रा के संचालन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
इन तमाम दावों के बीच ईडी की जांच क्या दिशा लेगी, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन अनिल अंबानी की वर्चुअली पेश होने की पेशकश से इतना जरूर साफ है कि यह पुराना मामला एक बार फिर सुर्खियों में लौट आया है और इसके अगले कदम पर सभी की नज़रें टिकी हैं।