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सोसाइटी कर्मियों की हड़ताल के बीच सरकार ने वैकल्पिक सिस्टम खड़ा किया, 15 नवंबर से खरीदी सुचारू रखने की तैयारियाँ तेज़।

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छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने से ठीक पहले पैदा हुए संकट को सरकार ने काफी हद तक संभाल लिया है। सोसाइटियों के प्रबंधकों, खरीदी प्रभारी और कंप्यूटर ऑपरेटरों की हड़ताल ने तैयारियों की रफ्तार को जरूर प्रभावित किया, लेकिन सरकार ने नई व्यवस्था खड़ी करके हालात को काबू में लाने का दावा किया है। गुरुवार को ही दो लाख से ज्यादा किसानों ने ‘तुंहर टोकन’ ऐप डाउनलोड कर लिया और इनमें से 18 हजार किसानों को खरीदी के लिए टोकन भी जारी हो चुके हैं। पहले ही दिन राज्यभर में करीब साढ़े तीन हजार टन धान की बुकिंग भी हो गई, जिससे साफ है कि किसान खरीदी प्रक्रिया को लेकर सक्रिय हैं।

हालांकि कर्मचारी संघ ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें स्वीकार नहीं होतीं, हड़ताल जारी रहेगी। यह स्थिति इसलिए भी असामान्य है क्योंकि पिछले कई वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है कि खरीदी शुरू होने से पूर्व इतनी बड़ी संख्या में सोसाइटी कर्मियों ने काम रोक दिया हो। इस आंदोलन का असर सीधा खरीदी केंद्रों पर पड़ रहा है, लेकिन सरकार ने दूसरे विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों को खरीदी व्यवस्था में तैनात कर खरीदी को बाधित न होने देने की तैयारी कर ली है।

उधर, एक और मोर्चा खुल गया है—राजस्व विभाग के पटवारियों ने धान खरीदी की ड्यूटी से खुद को अलग रखने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि उन्हें इस काम का तकनीकी अनुभव नहीं है और इस वजह से यदि उन्हें प्रबंधक या सह-प्रभारी बनाया जाता है तो खरीदी की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आयुक्त भू-अभिलेख को पत्र लिखकर इस ड्यूटी से मुक्त रखने की मांग की है।

इन सबके बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि खरीदी केंद्रों में किसी भी किसान को असुविधा न हो। बारदानों की उपलब्धता से लेकर पीने के पानी, छायादार बैठने की जगह और फड़-चबूतरों की व्यवस्था तक—सभी तैयारियों का फील्ड में जाकर मुआयना किया जा रहा है। सहकारिता विभाग, मार्कफेड और खाद्य विभाग संयुक्त रूप से सुनिश्चित कर रहे हैं कि 2739 उपार्जन केंद्रों पर 15 नवंबर से खरीदी बिना किसी रुकावट के शुरू हो जाए।

इसके साथ ही क्रय धान के उठाव की व्यवस्था भी पहले से ही तय की जा रही है, ताकि खरीदी केंद्रों पर भीड़ न बढ़े और किसानों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। ऐप आधारित टोकन व्यवस्था को लेकर किसानों का रिस्पॉन्स बताता है कि वे इस नए सिस्टम को अपनाने के लिए तैयार हैं और सरकार के वैकल्पिक इंतजामों से खरीदी प्रक्रिया को गति मिल सकती है।

हड़ताल और विरोध के बीच भी राज्य सरकार कोशिश कर रही है कि इस वर्ष की धान खरीदी में किसान कहीं भी अटकें नहीं—और मौजूदा संकेत यही बताते हैं कि शुरुआती चुनौतियों के बावजूद प्रक्रिया पटरी पर लौट रही है।

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