टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), जिसे घरेलू आईटी इंडस्ट्री का सबसे बड़ा और सबसे मूल्यवान नाम माना जाता था, अब वैल्यूएशन के लिहाज से इन्फोसिस और HCL टेक से भी पीछे हो गया है। लगभग 14 साल बाद कंपनी ने अपनी यह बढ़त खो दी है। TCS का मौजूदा प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 22.5 गुना तक फिसल गया है, जबकि इन्फोसिस 22.9 गुना और HCL टेक 25.5 गुना पर ट्रेड हो रहे हैं। यह संकेत है कि बाजार अब TCS को पहले जैसी प्रीमियम वैल्यू नहीं दे रहा।
बीते कई सालों से TCS का P/E रेश्यो इंडस्ट्री एवरेज से लगातार 15% ज्यादा रहा था। सितंबर 2021 में कंपनी का P/E रिकॉर्ड 38.2 तक पहुंच गया था और सितंबर 2024 में भी यह 32.6 गुना था, लेकिन पिछले एक साल में वैल्यूएशन की यह पूरी कहानी उलट गई। मुनाफे की धीमी रफ्तार, मार्जिन में कमी और प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कमजोर परफॉर्मेंस ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया और TCS के वैल्यूएशन पर भारी दबाव पड़ा।
मार्केट कैपिटलाइजेशन में गिरावट भी इसी बदलाव का बड़ा संकेत है। कंपनी का बाजार मूल्य जहां एक समय 15.44 लाख करोड़ रुपये था, वहीं अब यह घटकर लगभग 11.3 लाख करोड़ रुपये रह गया है। यानी महज एक साल में कंपनी की वैल्यू लगभग 27% कम हो गई। मार्च 2020 में निफ्टी के शीर्ष 5 आईटी कंपनियों में TCS का वेटेज 55% था, जो अब घटकर 43.4% रह गया है। यह दिखाता है कि निवेशकों का भरोसा किस तेजी से बदला है।
TCS को सबसे ज्यादा झटका उस समय लगा जब कोविड महामारी के बाद पूरी आईटी इंडस्ट्री की ग्रोथ धीमी पड़ी। हालांकि गिरावट पूरे सेक्टर में दिखी, लेकिन TCS जैसी दिग्गज को तुलनात्मक रूप से बड़ा नुकसान हुआ। मुनाफे की ग्रोथ पिछले चार तिमाहियों में सिर्फ 4.4% रही, जबकि शीर्ष 5 आईटी कंपनियों की औसत ग्रोथ 6% पहुंची। यह अंतर दर्शाता है कि TCS अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले गति नहीं पकड़ पाया।
इसी दौरान बैंकिंग, फाइनेंस और इंश्योरेंस (BFSE) सेक्टर का वेटेज निफ्टी में लगातार बढ़ रहा है। अब यह 35.4% तक पहुंच गया है, जो पिछले तीन वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है। निवेशकों का बड़ा झुकाव इस सेक्टर की ओर गया है, जिससे आईटी कंपनियों के शेयरों पर अतिरिक्त दबाव आया।
एक्सपर्ट्स भी TCS के हालिया परफॉर्मेंस को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं। इक्विनॉमिक्स रिसर्च के जी. चोक्कालिंगम बताते हैं कि TCS के मार्जिन कमजोर हुए हैं और ग्रोथ अनुमान भी नीचे की ओर हैं। बाजार को उम्मीद है कि यह रुझान आगे भी जारी रह सकता है—यही बात कंपनी के वैल्यूएशन के गिरने का सबसे बड़ा कारण बन रही है।
आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी के लिए यह स्थिति निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण है। TCS की अगली तिमाहियों का प्रदर्शन अब यह तय करेगा कि कंपनी अपने खोए हुए प्रीमियम वैल्यूएशन को फिर हासिल कर पाएगी या फिर यह बदलाव लंबे समय तक बना रहेगा।