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शराब घोटाला केस की जांच में नया मोड़—ED ने चैतन्य को सिंडिकेट का शीर्ष संचालक बताया, कांग्रेस ने कार्रवाई को बदले की राजनीति कहा।

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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की 61.20 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच कर दी है। जब्त की गई संपत्तियों में 364 प्लॉट और कृषि भूमि के हिस्से शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 59.96 करोड़ बताई गई है। इसके अलावा बैंक बैलेंस और एफडी के रूप में 1.24 करोड़ की चल संपत्तियां भी कुर्क की गई हैं। इस कार्रवाई के साथ अब तक इस मामले में कुल 276 करोड़ की संपत्ति अटैच हो चुकी है।

राजनीतिक हलचल भी तेज है। भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पैतृक संपत्ति कुर्क करके उन्हें डराया नहीं जा सकता। उनका कहना है कि जनता सब देख रही है और वे “डरो मत” की सोच के साथ अन्याय के खिलाफ लड़ते रहेंगे। कांग्रेस ने भी इस कार्रवाई को “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया है और आरोप लगाया है कि राज्य की जनता इसे माफ नहीं करेगी।

चैतन्य बघेल को ED पहले ही 8 जुलाई 2025 को गिरफ्तार कर चुकी है, और वह न्यायिक हिरासत में है। एजेंसी ने बताया कि शराब घोटाले से लगभग 2500 करोड़ रुपए की अवैध कमाई हुई थी और चैतन्य इस पूरे सिंडिकेट के शीर्ष पर था। उसकी राजनीतिक और पारिवारिक स्थिति की वजह से वही पूरे नेटवर्क का नियंत्रण करता था—इकट्ठा होने वाला पैसा, उसका चैनलाइजेशन और वितरण उसके निर्देश पर होता था। जांच में यह भी सामने आया कि उसने इस अवैध आय को अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ‘विठ्ठल ग्रीन’ में निवेश कर वैध दिखाने की कोशिश की।

यह घोटाला ACB–EOW रायपुर द्वारा दर्ज FIR से शुरू हुआ था, जिसमें IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराएं लगाई गई थीं। इसके बाद ED ने जांच संभाली और धीरे-धीरे पूरा नेटवर्क सामने आने लगा। पूर्व IAS अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD AP त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर, त्रिलोक ढिल्लन और अन्य बड़े नाम भी कार्रवाई की जद में आ चुके हैं। पहले ही 215 करोड़ की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है।

जांच में सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह निकली कि सिंडिकेट ने सालों तक शराब बिक्री से भारी कमाई की। कमीशन वसूली के लिए डिस्टलरी संचालकों पर प्रति पेटी 75 से 100 रुपए तक का भार डाला गया। इसके बाद नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों के जरिए बेचा गया, ताकि बिना शुल्क अदा किए भारी मुनाफा कमाया जा सके। खाली बोतलों से लेकर नकली होलोग्राम तक, पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से चलता रहा। ACB की जांच में सामने आया कि लगभग 40 लाख पेटियां अवैध रूप से बेची गईं।

15 जिलों में यह समानांतर शराब तंत्र पूरी ताकत से सक्रिय था, जहां दुकानों को निर्देश दिए गए कि नकली शराब का रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में न चढ़ाया जाए। इस पूरे खेल से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ, जबकि सिंडिकेट के हाथों में हजारों करोड़ की अवैध कमाई पहुंची।

ED की इस ताजा कार्रवाई से मामला और गंभीर हो गया है। चैतन्य बघेल को सिंडिकेट का “मुखिया” बताते हुए ED ने जिस तरह से प्लॉट, जमीन और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को अटैच किया है, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आगे भी जांच का दायरा और बड़ा हो सकता है।

राजनीतिक, प्रशासनिक और कारोबारी स्तर पर फैला यह घोटाला आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है।

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