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जयपुर–रिंगस टोल रोड प्रोजेक्ट से जुड़े FEMA मामले में ईडी का कड़ा रुख—अनिल अंबानी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की छूट नहीं मिलेगी

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रिलायंस एडीएजी समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी एक बार फिर ईडी की जांच के घेरे में हैं। लेकिन इस बार मुद्दा कुछ अलग है—उन्होंने ईडी के समन पर वर्चुअल पेशी की मांग की थी, जिसे प्रवर्तन निदेशालय ने सख्ती से ठुकरा दिया है। ईडी का कहना है कि इस मामले में “शारीरिक उपस्थित होना अनिवार्य” है और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए कोई प्रावधान नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक, अनिल अंबानी शुक्रवार को दिल्ली स्थित ईडी कार्यालय में दूसरी बार पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए। इसके बजाय उनके प्रतिनिधियों ने ईडी को ईमेल करके आग्रह किया कि उन्हें ऑनलाइन मोड में पूछताछ की अनुमति दी जाए। ईडी ने जवाब में साफ कहा कि यह विकल्प उपलब्ध नहीं है। एजेंसी ने दोहराया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

अंबानी ने अपनी तरफ से बयान जारी कर कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग देने को तैयार हैं। वर्चुअल मोड इसलिए चाहा गया ताकि वे सुविधाजनक तरीके से जवाब दे सकें। लेकिन ईडी ने किसी भी प्रकार की छूट देने से इनकार कर दिया।

यह समन FEMA (Foreign Exchange Management Act) से जुड़ा है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम (PMLA) से संबंधित नहीं है। जांच 2010 के जयपुर–रिंगस टोल रोड प्रोजेक्ट के एक EPC कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी है, जिसमें सड़क निर्माण से जुड़े आर्थिक लेन-देन की अनियमितताओं की जांच की जा रही है। ईडी के अनुसार यह पूरा कॉन्ट्रैक्ट घरेलू था और इसमें विदेशी मुद्रा का कोई लेनदेन नहीं हुआ था—लेकिन कुछ वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर ईडी स्पष्टीकरण चाहती है।

14 नवंबर की तारीख के लिए ईडी ने अंबानी को दोबारा पेश होने का नोटिस भेजा था, लेकिन वे उस दिन भी उपस्थित नहीं हुए। इससे पहले, अगस्त 2024 में ईडी ने उन्हें 17,000 करोड़ रुपए के कथित बैंक घोटाले से जुड़े प्रकरण में लगभग नौ घंटे तक पूछताछ की थी।

ईडी का रुख साफ है—इस मामले में अनिल अंबानी को physical appearance से छूट नहीं दी जाएगी, और अगली पेशी की तारीख पर उनका उपस्थित होना अनिवार्य होगा।

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