मॉस्को में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल टेक इवेंट में रूस का पहला AI-पावर्ड ह्यूमनॉइड रोबोट AIDOL जैसे ही स्टेज पर पहुंचा, उसके साथ कुछ ऐसा हुआ जिसका वीडियो अब पूरी दुनिया देख रही है। करीब 50 पत्रकारों की मौजूदगी में किया गया यह पब्लिक डेमो—यानी AIDOL का पहला बड़ा परिचय—सिर्फ कुछ सेकंड में फेल हो गया।
स्टेज पर हुआ क्या? ग्रैंड एंट्री से सीधा गिरावट तक
AIDOL को इवेंट में एक स्टार परफॉर्मर की तरह पेश किया गया।
‘रॉकी’ का फेमस थीम सॉन्ग बजा।
रोबोट ने स्टेज पर चढ़कर इंसानों की तरह हाथ हिलाया।
लेकिन उसी पल वह संतुलन खो बैठा—कुछ कदम लड़खड़ाया और ज़ोर से गिर पड़ा।
स्टेज पर मौजूद मीडिया कर्मियों के अनुसार, एक सेकंड के लिए पूरा हॉल शांत हो गया, फिर दर्शकों ने तालियां बजाकर माहौल संभालने की कोशिश की।
गिरने के तुरंत बाद ऑर्गेनाइजर्स दौड़े—रोबोट को जल्दी से खींचकर अंदर ले जाया गया और जगह पर काला पर्दा लगा दिया गया, ताकि हलचल छिपाई जा सके। आयोजकों ने वजह “कैलिब्रेशन और लाइटिंग प्रॉब्लम” बताई।
डेवलपर्स की सफाई: ‘रोबोट अभी सीख रहा है’
AIDOL के CEO व्लादिमीर विटुखिन ने रूसी न्यूज़ एजेंसी TASS से कहा—
“रोबोट अभी लर्निंग स्टेज में है। यह गलती उसके एक्सपीरियंस का हिस्सा बनेगी। यह तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि विकास का सामान्य चरण है।”
डेवलपर्स ने यह भी स्पष्ट किया कि यह घटना सिस्टम फेलियर नहीं थी—AIDOL को फिलहाल वास्तविक-मानव जैसी चाल और मूवमेंट्स के लिए ट्रेन किया जा रहा है।
AIDOL—क्या कर सकता है यह AI रोबोट?
कंपनी के अनुसार, AIDOL—
• चल सकता है
• वस्तुएं उठा सकता है
• इंसानों से बातचीत कर सकता है
• इंडस्ट्री, वेयरहाउस, मेडिकल सेक्टर और एंटरटेनमेंट में काम कर सकता है
इस रोबोट की खासियत इसका ह्यूमन-लाइक फेस है। जहां दुनिया के अधिकतर ह्यूमनॉइड रोबोट बिना चेहरे के होते हैं, AIDOL का चेहरा इंसानों जैसा दिखे—इस पर भारी इन्वेस्टमेंट किया गया है। कंपनी का लक्ष्य AI-Embodied Robot बनाना है—यानी AI को एक फिजिकल, इंसान जैसी मशीन में उतारना।
ग्लोबल ह्यूमनॉइड रेस—दुनिया में कितनी तेज़ है स्पर्धा?
दुनिया में ह्यूमनॉइड रोबोट्स की प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
• 2024 में इस सेक्टर में 1.6 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश हुआ।
• इसमें एलन मस्क के टेस्ला Optimus प्रोजेक्ट जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
• बोस्टन डायनेमिक्स का ATLAS रोबोट भी ग्लोबल लेवल पर चर्चा में रहता है।
रूस ने AIDOL के साथ इस रेस में कदम तो रख दिया, लेकिन पहला ही डेब्यू इस बात की याद दिलाता है कि “ह्यूमन जैसा रोबोट बनाना आसान नहीं”—और मशीनों का सीखना भी इंसानों की तरह गिरकर ही होता है।