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हार्निया का झूठा इलाज: श्री गोविंद हॉस्पिटल पर बड़ी कार्रवाई, आयुष्मान योजना से एक साल का निलंबन — 150 क्लेम जांच के दायरे में

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रायपुर में स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान भारत योजना का दुरुपयोग करने वाले श्री गोविंद हॉस्पिटल पर कड़ी कार्रवाई की है। पेट दर्द की साधारण शिकायत लेकर आई एक महिला को हार्निया बताकर झूठा उपचार करने के मामले में अस्पताल को पूरे एक वर्ष के लिए योजना से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उन अनेक गंभीर शिकायतों के बाद हुई, जिनके आधार पर अस्पताल द्वारा किए गए करीब 150 क्लेम भी जांच के घेरे में लाए गए हैं। विभाग अब अस्पताल के लाइसेंस को पूरी तरह निरस्त कर बंद कराने की भी सिफारिश कर चुका है।

कैसे सामने आया पूरा घोटाला?
बांसटाल स्थित करीब 30 बेड के इस अस्पताल के खिलाफ राष्ट्रीय फ्रॉड इंवेस्टिगेशन टीम से शिकायतें मिली थीं। इसी जानकारी के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर जांच की। जांच में पाया गया कि अस्पताल सामान्य मरीजों को गंभीर दिखाकर महंगे पैकेज ब्लॉक कर रहा था और झूठे उपचार कर रहा था।

हार्निया के नाम पर किए गए फर्जी इलाज का भी गंभीर मामला सामने आया। अस्पताल द्वारा जमा की गई सोनोग्राफी रिपोर्ट जांच में फर्जी पाई गई। जब अस्पताल प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा गया, तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

इसी वजह से योजना के तहत किए गए लगभग डेढ़ सौ पैकेज को भी संदेह के आधार पर होल्ड कर दिया गया है और अब सभी की विस्तृत जांच चल रही है।

8 अन्य अस्पतालों पर भी गिरी गाज
फर्जीवाड़े और अनियमितताओं की अन्य शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए विभाग ने आठ और अस्पतालों को भी निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि इस प्रकार है—

अस्पताल का नाम निलंबन अवधि
श्री गोविंद हॉस्पिटल, बांसटाल 1 वर्ष
वरदान हॉस्पिटल, शंकर नगर 3 माह
जौहरी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, भाठागांव 3 माह
न्यू रायपुरा हॉस्पिटल, महादेवघाट रोड 3 माह
सौभाग्य हॉस्पिटल, खमतराई 3 माह
सिद्धि विनायक हॉस्पिटल, उरकुरा 3 माह
शिवम हॉस्पिटल, कुशालपुर 3 माह
लक्ष्मी हॉस्पिटल एंड मैटर्निटी होम, आरंग 3 माह

राष्ट्रीय स्तर पर सख्त निगरानी
आयुष्मान भारत योजना के तहत हितग्राहियों को सही उपचार मिले, इसके लिए राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर लगातार निगरानी की जा रही है। राष्ट्रीय टीम समय-समय पर मिली जानकारी को राज्य टीम को भेजती है, जिसके आधार पर स्थानीय जांच और कार्रवाई होती है। इससे पहले भी कई बड़े अस्पतालों को योजना से बाहर किया जा चुका है।

जांच अधिकारियों की पुष्टि
आयुष्मान योजना एवं नर्सिंग होम एक्ट के जिला नोडल अधिकारी डॉ. अविनाश चतुर्वेदी ने बताया कि कई अस्पतालों की जांच में गंभीर अनियमितताएं मिली थीं। इनके आधार पर निलंबन की अनुशंसा की गई है। उन्होंने कहा कि योजना के लाभार्थियों को सही और वास्तविक उपचार मिले, इसके लिए निगरानी लगातार जारी रहेगी।

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