दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में हाल ही हुए कार ब्लास्ट ने देश को झकझोर दिया। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हुई और 20 घायल हुए। जांच में यह सामने आया कि विस्फोट वाली कार कई बार खरीदी और बेची गई थी। पुलिस ने पहले मालिक से लेकर सभी पूर्व मालिकों को जांच में शामिल किया है।
यह घटना बताती है कि पुरानी कारों का लेन-देन सिर्फ खरीद–फरोख्त का मामला नहीं बल्कि कानूनी जिम्मेदारी भी है।
अक्सर लोग गाड़ी बेचकर यह सोच लेते हैं कि उनका उससे कोई संबंध नहीं रहा, लेकिन अगर RC ट्रांसफर नहीं हुआ, तो किसी भी अपराध, दुर्घटना या चालान की जिम्मेदारी पुराने मालिक पर भी आ सकती है।
इसलिए, चाहे आप पुरानी कार खरीद रहे हों या बेच रहे हों—कुछ जरूरी नियम और डॉक्यूमेंट समझना बेहद आवश्यक है।
पुरानी कार खरीदते समय 8 डॉक्यूमेंट्स जरूर चेक करें
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ऑरिजिनल RC (Registration Certificate)
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इंश्योरेंस पॉलिसी (नाम और वैधता)
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PUC सर्टिफिकेट (Pollution Under Control)
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रोड टैक्स और चालान रिकॉर्ड
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NOC (अगर कार पर लोन था या दूसरे राज्य की है)
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सर्विस हिस्ट्री
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इंजन और चेसिस नंबर की फिजिकल मिलान
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सेल लेटर/सेल एग्रीमेंट की कॉपी
ये सभी डॉक्यूमेंट आपको भविष्य के विवाद, धोखाधड़ी और कानूनी परेशानी से बचाते हैं।
पुरानी कार बेचते समय 11 जरूरी सावधानियां
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RC ट्रांसफर के लिए फॉर्म 29–30 तुरंत जमा करवाएं
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खरीदार की आईडी प्रूफ की कॉपी रखें
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सेल लेटर पर दोनों पक्षों के हस्ताक्षर करवाएं
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डिलीवरी नोट तैयार करें (कब गाड़ी किसे दी गई)
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इंश्योरेंस ट्रांसफर करवाएं
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सर्विस रिकॉर्ड और चालान हिस्ट्री साफ रखें
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ऑनलाइन RTO पोर्टल पर ट्रांसफर की स्थिति ट्रैक करते रहें
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पुराने नंबर पर आने वाले चालान को तुरंत चैलेंज करें
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गाड़ी पर अगर लोन है तो NOC अवश्य लें
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एक्सीडेंट हिस्ट्री छिपाएं नहीं
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पेमेंट की लिखित रसीद रखें
क्या कहते हैं परिवहन अधिकारी?
सौरभ कुमार (RTO, बाँदा, UP) बताते हैं कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 50 पुरानी गाड़ियों की खरीद-फरोख्त को स्पष्ट रूप से विनियमित करती है। RC ट्रांसफर पूरे लेनदेन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है—ट्रांसफर पूरा होने तक पुराना मालिक कानूनी रूप से जिम्मेदार रहता है।
लोन वाली कार बेचना चाहते हैं? ये है पूरी प्रक्रिया
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बैंक से NOC और हाइपोथिकेशन रिमूवल लेटर लें
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फॉर्म 35 के साथ RTO में हाइपोथिकेशन हटवाएं
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अगर खरीदार लोन आगे चुकाना चाहता है, तो बैंक की लिखित अनुमति जरूरी
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सेल एग्रीमेंट में EMI की जिम्मेदारी साफ लिखें
लोन क्लियर हुए बिना गाड़ी का मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं होता।
RC, इंश्योरेंस और PUC की वैधता कैसे चेक करें?
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RC: vahan.parivahan.gov.in
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इंश्योरेंस: iib.gov.in या संबंधित बीमा कंपनी
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PUC: puc.parivahan.gov.in
इन वेबसाइट्स पर रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर सबकी वैधता जांची जा सकती है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म—सुरक्षित या जोखिम भरा?
OLX, Cars24, Spinny, Droom जैसे प्लेटफॉर्म सुविधाजनक हैं, लेकिन धोखाधड़ी का खतरा रहता है।
सावधान रहें—
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कार देखने से पहले एडवांस भुगतान न करें
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फर्जी डॉक्यूमेंट्स की पहचान करें
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गाड़ी हमेशा फिजिकली इंस्पेक्ट करें
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टेस्ट ड्राइव दौरान मालिक की उपस्थिति सुनिश्चित करें
कार बेचने के बाद ट्रांसफर कितने दिनों में कराना जरूरी?
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एक ही राज्य में: 14 दिन
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दूसरे राज्य में: 45 दिन
समय पर ट्रांसफर नहीं हुआ तो किसी भी चालान, एक्सीडेंट या अपराध की जिम्मेदारी पुराना मालिक उठाएगा।
RC ट्रांसफर में कितना समय और फीस लगती है?
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समय: 7–30 दिन
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फीस:
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दोपहिया: ₹150–300
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चारपहिया: ₹300–500
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अन्य चार्ज: ₹50–200
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दूसरे राज्य के लिए NOC + री-रजिस्ट्रेशन फीस अतिरिक्त
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