छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन में लंबे समय से चल रही हलचल अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। जिलाध्यक्षों के फेरबदल को लेकर बनाई जा रही नई सूची अगले दो दिनों के भीतर जारी हो सकती है। रविवार देर रात दिल्ली में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें जिलों के पैनल, नामों की समीक्षा और अंतिम चयन पर विस्तार से चर्चा की गई।
सोमवार को होने वाली एआईसीसी बैठक में इन नामों पर अंतिम मुहर लगना तय माना जा रहा है। इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज और प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट के साथ उनके तीनों सह-प्रभारी—एस.ए. सम्पत कुमार, जरिता लैतफलांग और विजय जांगिड़—भी शामिल होंगे। इन बैठकों के दौर ने साफ कर दिया है कि संगठन में बड़ा और निर्णायक बदलाव आने वाला है।
कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ के दौरान 9 से 17 अक्टूबर के बीच 41 जिलों में भेजे गए पर्यवेक्षकों ने हर जिले से छह-छह नामों का पैनल तैयार कर एआईसीसी तक भेजा था। वरिष्ठ नेताओं से सलाह-मशविरा और गहन छंटनी के बाद बनाई गई शॉर्टलिस्ट पर अब अंतिम सहमति हो चुकी है। राहुल गांधी के साथ हुई ताजा चर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार चुनाव के बाद कांग्रेस अब पूरी तरह संगठन को मजबूत करने के मोड में जा चुकी है और छत्तीसगढ़ में होने वाला यह फेरबदल उसी रणनीति का अहम हिस्सा है।
सूत्र बताते हैं कि रायपुर शहर कांग्रेस की कमान सुबोध हरितवाल के हाथों में और रायपुर ग्रामीण की कमान प्रवीण साहू को सौंपे जाने की पूरी संभावना है। दुर्ग ग्रामीण में राकेश ठाकुर का नाम तेज़ी से चल रहा है। अंबिकापुर में बालकृष्ण पाठक और जगदलपुर में सुशील मौर्या जिलाध्यक्ष बनने की रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। रायपुर से जगदलपुर तक कई जिलों के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं और बस औपचारिक घोषणा बाकी है।
बिलासपुर और धमतरी में इस बार नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं। वहीं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में पंकज तिवारी और मनोज गुप्ता, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में अशोक श्रीवास्तव और के. डमरू रेड्डी का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। दुर्ग शहर कांग्रेस में आरएन वर्मा और धीरज बाकलीवाल, जबकि भिलाई में मुकेश चंद्राकर और साकेत चंद्राकर की दावेदारी सबसे मजबूत दिखाई दे रही है। कई जिलों में मुकाबला बेहद नजदीकी है और घोषणा से पहले दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ गई है।
नई सूची में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। 41 जिलाध्यक्षों में से सिर्फ पांच ही ऐसे हैं जिन्हें दोबारा अवसर मिल सकता है। पिछले कुछ महीनों में जिन जिलाध्यक्षों की नियुक्ति हुई है, उन्हें छोड़कर बाकी जिलों में नए चेहरों को लाया जाना लगभग तय है। कांग्रेस अब पहली बार परफॉर्मेंस-बेस्ड सिस्टम अपनाने जा रही है, जिसमें हर छह महीने में जिलाध्यक्षों की कार्यकुशलता की समीक्षा होगी। दुर्ग, पाटन, सरगुजा, अंबिकापुर और बलरामपुर के जिलाध्यक्ष अपनी सीट बचा पाने की स्थिति में बताए जा रहे हैं।
पूरे प्रदेश में नई सूची को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। कौन हटेगा, कौन आएगा, किस जिले में किस गुट का पलड़ा भारी रहेगा—इन सब पर चर्चा चरम पर है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए आने वाले 48 घंटे बेहद अहम होने वाले हैं, क्योंकि इस सूची के साथ ही संगठन की आने वाली दिशा और रणनीति भी तय होगी।