दिल्ली-एनसीआर की हवा एक बार फिर जानलेवा स्तर के बेहद करीब पहुंच गई है। राजधानी दिल्ली में लगातार कई दिनों से प्रदूषण का स्तर खतरनाक बना हुआ है और मंगलवार की सुबह भी हालात कुछ बेहतर नहीं दिखे। हल्की धुंध और कोहरे के बीच दिल्ली की हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज हुई, हालांकि पिछले दिन की तुलना में मामूली सुधार जरूर देखा गया। फिर भी, यह सुधार स्वास्थ्य के खतरे को कम करने के लिए नाकाफी है, क्योंकि हवा में मौजूद जहरीले तत्व लोगों के लिए गंभीर समस्या पैदा कर रहे हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार सुबह 7 बजे राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 341 दर्ज किया गया। यह स्तर सोमवार के 359 और रविवार के 377 की तुलना में थोड़ा नीचे है, लेकिन आरामदायक श्रेणी से बहुत दूर। राजधानी के कई हिस्सों में तो स्थिति इससे भी ज्यादा खराब रही और एक्यूआई भयावह 400 के पार पहुंच गया। बवाना में 426, जहांगीरपुरी में 418, वजीरपुर में 412 और विवेक विहार में 402 का एक्यूआई दर्ज किया गया, जो स्पष्ट रूप से ‘गंभीर’ श्रेणी दर्शाता है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को सांस फूलने, आंखों में जलन और कमजोरी जैसी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है।
दिल्ली के अन्य हिस्से जैसे धौला कुआं, अक्षरधाम, गाजीपुर और आनंद विहार भी प्रदूषण की पकड़ में बुरी तरह फंसे दिखे, जहां एक्यूआई 345 से 381 के बीच दर्ज किया गया। सीपीसीबी के मानकों के अनुसार, 300 के पार पहुंचने के बाद हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ और 400 से ऊपर ‘गंभीर’ कहलाती है, जो सबसे खतरनाक स्थिति है।
इस बीच, दिल्ली के बगल में बसे गाजियाबाद ने एक बार फिर देश के सबसे प्रदूषित शहर का टैग हासिल कर लिया है। सोमवार को पूरे देश के 245 शहरों में सिर्फ गाजियाबाद का औसत एक्यूआई 400 के पार पहुंचा और 401 पर दर्ज हुआ, जबकि रविवार को यह 419 तक चला गया था। अक्टूबर में भी इसी तरह की स्थिति बनी थी। गाजियाबाद के ठीक बाद ग्रेटर नोएडा 390 के एक्यूआई के साथ दूसरे नंबर पर रहा, जहां हवा का स्तर भी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में ही रहा।
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सर्दी की शुरुआत में हवा स्थिर होने और धूल-धुएं के मिश्रण से हालात तेजी से बिगड़ते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में हवा और भारी पड़ सकती है, जिसका सीधा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस-हृदय रोगियों पर सबसे ज्यादा होगा।