टाटा मोटर्स, जो 1986 में सेंसेक्स की शुरुआत से इस प्रतिष्ठित इंडेक्स का हिस्सा रही है, अब पहली बार उससे बाहर होने की कगार पर दिखाई देती है। यह वही कंपनी है जिसने लगभग चार दशकों तक सेंसेक्स के टॉप-30 स्टॉक्स में अपनी जगह बनाए रखी, लेकिन अक्टूबर में हुए डिमर्जर ने उसकी स्थिति कमजोर कर दी। यात्री वाहन और कमर्शियल वाहन व्यवसाय के अलग हो जाने के बाद टाटा मोटर्स के मार्केट कैप का बंटवारा हो गया और कंपनी सेंसेक्स की न्यूनतम शर्त पूरी नहीं कर पा रही है। वर्तमान में सेंसेक्स में टिके रहने के लिए कंपनी का मार्केट कैप कम से कम दो लाख करोड़ रुपए होना चाहिए, जबकि डिमर्जर के बाद पैसेंजर व्हीकल यूनिट का मार्केट कैप करीब 1.37 लाख करोड़ और कमर्शियल व्हीकल कंपनी का 1.19 लाख करोड़ रुपए पर आ गया है।
इसी बीच, सेंसेक्स की अगली रीबैलेंसिंग की तारीख घोषित हो चुकी है। बीएसई 19 दिसंबर को यह बदलाव लागू करेगा, और मौजूदा स्थिति को देखते हुए इंडेक्स में टाटा मोटर्स की जगह देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंटरग्लोब एविएशन—यानी इंडिगो—शामिल हो सकती है। इंडिगो का मार्केट कैप 2.27 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है और यह उन गैर-सदस्य कंपनियों में सबसे ऊपर है जो सेंसेक्स में आने की शर्तें पूरी करती हैं। ग्रासिम इंडस्ट्रीज का नाम भी संभावित नए प्रवेशकों में शामिल किया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि सेंसेक्स के मूल 30 शेयरों में से सिर्फ रिलायंस, HUL, ITC और टाटा मोटर्स ही शुरुआत से अब तक बने हुए हैं। नेस्ले को हाल ही में बाहर किया गया था, और अब अगला नंबर टाटा मोटर्स का माना जा रहा है।
सेंसेक्स की सदस्यता किसी भी कंपनी के लिए सिर्फ प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि निवेशकों के भरोसे का भी संकेत होती है। यही कारण है कि अगर टाटा मोटर्स बाहर होती है, तो इसका तत्काल नकारात्मक असर पड़ सकता है। विश्लेषण के अनुसार, इंडेक्स से हटाए जाने पर संस्थागत निवेशकों द्वारा की जाने वाली स्वचालित बिकवाली के चलते करीब 2,232 करोड़ रुपए बाजार से निकल सकते हैं। दूसरी तरफ, इंडिगो को जोड़ा जाता है तो उसमें अतिरिक्त निवेश के चलते लगभग 3,157 करोड़ रुपए बाजार में आने का अनुमान है। ग्रासिम को शामिल किया गया तो उसमें भी 2,526 करोड़ रुपए तक का नया निवेश आ सकता है।
इन बाजार उथल-पुथल के बीच टाटा ग्रुप के भीतर भी तनाव उभरने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रुप चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन आर. वेंकटरामनन के बीच मतदान अधिकारों को लेकर मतभेद की खबरें चर्चा में हैं। चंद्रशेखरन चाहते हैं कि ट्रस्ट के नॉमिनेटेड सदस्यों के वोटिंग अधिकार सीमित हों, जबकि वेंकटरामनन इसे ट्रस्ट की स्वायत्तता पर हमला बता रहे हैं। इसी विवाद के बीच नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा का सर रतन टाटा ट्रस्ट में शामिल होना भी नए सवाल उठा रहा है, जिसे फिलहाल रोक दिया गया है।
इस सबके साथ, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के शेयरों पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। 17 नवंबर को शेयर करीब 7% तक गिरकर 363 रुपए तक पहुंच गया। बीते पांच दिनों में यह 8% से ज्यादा टूटा है, जबकि एक महीने में 6%, छह महीने में 15% और एक साल में करीब 20% का नुकसान हुआ है। कंपनी को जुलाई–सितंबर तिमाही में 6,368 करोड़ रुपए का भारी घाटा उठाना पड़ा है। इसका मुख्य कारण जगुआर लैंड रोवर पर हुआ साइबर अटैक बताया गया है, जिसने उत्पादन पूरी तरह प्रभावित कर दिया।
कुल मिलाकर, टाटा मोटर्स आज बाजार, सेंसेक्स और समूह प्रबंधन—तीनों मोर्चों पर दवाब झेल रही है। 19 दिसंबर की घोषणा यह तय करेगी कि चार दशकों पुराना एक अध्याय बंद होगा या कंपनी अगले चक्र के लिए खुद को फिर से खड़ा करने का समय पाएगी।