भारतीय शेयर बाजार में लगातार छह दिनों से जारी तेजी आखिरकार मंगलवार को थम गई, जब वैश्विक बाजारों की कमजोरी और निवेशकों की सतर्कता ने सेंसेक्स और निफ्टी दोनों को दबाव में ला दिया। सुबह से ही बेचैनी भरा माहौल दिखा और 9:59 बजे तक सेंसेक्स लगभग 325 अंक फिसलकर 84,800 के करीब पहुंच गया। इसी दौरान निफ्टी भी 124 अंकों की गिरावट के साथ 25,889 के नीचे आ गया। यह गिरावट मुख्य रूप से ग्लोबल मार्केट के कमजोर रुख और साप्ताहिक डेरिवेटिव एक्सपायरी से जुड़े उतार–चढ़ाव की आशंकाओं से जुड़ी मानी जा रही है।
बाजार का दबाव सिर्फ बड़े इंडेक्स तक सीमित नहीं रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी साफ दिखाई दी, जहां निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.4 प्रतिशत तक टूट गए। इंडिया VIX में हल्की बढ़ोतरी ने यह संकेत दिया कि आने वाले दिनों में अस्थिरता बढ़ सकती है। बीएसई के लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में फिसलते दिखे। आईटी, एफएमसीजी, रियल्टी और मेटल शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। हालांकि, इस पूरे गिरावट वाले माहौल में PSU बैंकिंग इंडेक्स तीसरे दिन भी मजबूती बनाए रखने में कामयाब रहा और बाजार को आंशिक सहारा देता नजर आया।
बीएसई के विभिन्न सूचकांकों की बात करें तो सेंसेक्स 352 अंक गिरा, बैंकएक्स में हल्की गिरावट रही और स्मॉलकैप एवं लार्ज-कैप आधारित इंडेक्स भी नीचे खिसकते दिखे। हालांकि, इस मंदी के बीच कुछ शेयरों ने दम दिखाया। बीबीटीसी, सनडर्म फास्टनर्स, जीएमआर एयरपोर्ट, जीएमआर पीएंडयूआई और अतुल जैसे टॉप गेनर्स ने 3 से 6 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज कर बाजार में थोड़ी सकारात्मकता बनाए रखी। इसके उलट, केन्स, वेबेल सोलर, आईनॉक्स ग्रीन, एवलॉन और केमप्रो जैसे स्टॉक 3 से 6 प्रतिशत तक टूटकर टॉप लूजर्स की सूची में शामिल रहे।
मार्केट ब्रेड्थ भी स्पष्ट रूप से कमजोर रही। कुल 3,572 ट्रेडिंग शेयरों में से केवल 1,268 शेयर बढ़त में रहे, जबकि 2,122 स्टॉक्स गिरावट के साथ बंद होने की ओर बढ़ते दिखे। दिलचस्प रूप से 78 शेयर 52-हफ्ते के नए उच्च स्तर पर पहुंचे, जबकि 109 शेयर अपने साल के सबसे निचले स्तर तक फिसल गए। तेज़ी के लंबे दौर के बाद आने वाला यह ठहराव बाजार के लिए स्वाभाविक माना जा रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में भले ही बाजार में हल्की अस्थिरता जारी रहे, लेकिन भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक उम्मीदें और हालिया मजबूत तिमाही नतीजे निवेशकों की धारणा को सहारा देते रहेंगे। इस बीच, बीएसई का कुल मार्केट कैप गिरावट के साथ 474.95 लाख करोड़ रुपये (लगभग 5.36 ट्रिलियन डॉलर) पर आ गया है, जो मंदी के दबाव का सीधा संकेत देता है।