मोबाइल फोन की पहचान से छेड़छाड़ करने वालों की अब खैर नहीं। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि मोबाइल फोन के 15 अंकों वाले इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी यानी IMEI नंबर में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। दूरसंचार विभाग ने सोमवार को जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया कि इसके लिए तीन साल तक की कैद, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा के रूप में दिए जा सकते हैं। यह सख्त कार्रवाई दूरसंचार अधिनियम 2023 और टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम 2024 के तहत होगी।
सरकार ने सभी मोबाइल निर्माताओं, ब्रांड मालिकों, आयातकों, डीलरों और विक्रेताओं को चेताया है कि किसी भी ऐसी डिवाइस का उत्पादन, बिक्री या उपयोग जिसमें छेड़छाड़ किया हुआ या बदला जा सकने वाला IMEI नंबर हो, सीधे कानूनी कार्रवाई को आमंत्रित करेगा। टेलीकॉम विभाग के मुताबिक, IMEI जैसी पहचान से छेड़छाड़ कानून-व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा पैदा करती है और अपराधियों को ट्रैक करना मुश्किल बना देती है। यही वजह है कि इसके खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।
दूरसंचार अधिनियम 2023 की धारा 42(7) के तहत, कोई भी व्यक्ति अगर यह जानते हुए भी ऐसे मोबाइल फोन, मॉडेम, सिम बॉक्स या रेडियो उपकरणों को अपने पास रखता है जिनमें छेड़छाड़ किए गए पहचान कोड मौजूद हैं, तो यह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना जाएगा। धारा 42(6) उन लोगों के खिलाफ भी समान सजा का प्रावधान करती है जो इस तरह के अपराधों को बढ़ावा देते हैं या ऐसी डिवाइसों की सप्लाई, निर्माण या व्यापार में शामिल होते हैं।
टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम 2024 भी इस मामले को और कठोर बनाते हैं। नियमों में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति यदि दूरसंचार उपकरण की पहचान संख्या को जानबूझकर हटाता, मिटाता, बदलता या संशोधित करता है, या ऐसे हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर को अपने पास रखता है जो IMEI बदलने की क्षमता रखते हैं, तो यह सीधे सजा योग्य अपराध होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रोग्राम करने योग्य या बदले जा सकने वाले IMEI वाले डिवाइस भी छेड़छाड़ माने जाएंगे और इन पर भी समान सजा लागू होगी।
दूरसंचार विभाग ने यह भी बताया कि देश में IMEI डेटाबेस को केंद्र स्तर पर प्रबंधित किया जा रहा है। पुराने मोबाइल, स्मार्टवॉच, टैबलेट, वाई-फाई हॉटस्पॉट, डोंगल जैसे सभी उपकरण जिनमें IMEI नंबर होता है, इन्हें “डिवाइस सेतु–ICDR पोर्टल” पर पंजीकृत करना अनिवार्य होगा। इसी डेटाबेस की मदद से छेड़छाड़ वाले उपकरणों की पहचान की जाएगी। पुरानी डिवाइस खरीदने-बेचने वालों को भी पैसे के लेन-देन से पहले IMEI सत्यापन कराना जरूरी होगा और इसके लिए निर्धारित शुल्क देना होगा।
सरकार का कहना है कि यह कदम फर्जीवाड़े को रोकने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने, अवैध मोबाइल लेन-देन पर अंकुश लगाने और टैक्स चोरी को रोकने के लिए आवश्यक है। नियमों के उल्लंघन पर सख्त से सख्त दंड दिया जाएगा, ताकि भारत का दूरसंचार ढांचा सुरक्षित और पारदर्शी बना रहे।