छत्तीसगढ़ में चौंकाने वाला खुलासा—ISIS के पाक मॉड्यूल ने सोशल मीडिया गेम के जरिए नाबालिगों को अपने कब्जे में लिया, डार्क वेब पर ट्रेनिंग देकर सौ से ज्यादा लड़कों का नेटवर्क तैयार कराया।
रायपुर और भिलाई क्षेत्र में दो नाबालिगों के ISIS से जुड़े होने का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हलचल मच गई है। एटीएस की जांच में पता चला है कि ये दोनों किशोर पिछले चार से पांच साल से ISIS के पाक मॉड्यूल के संपर्क में थे। अधिकारियों के मुताबिक बच्चों को इस तरह ब्रेनवॉश करने के मामले पहले जम्मू-कश्मीर में मिलते रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में यह अपने तरह की पहली गंभीर घटना है, जिसमें आतंकी सीधे नाबालिगों को टार्गेट कर रहे थे।
सूत्रों के अनुसार दोनों किशोर आपस में दोस्त हैं और मूल रूप से भिलाई के रहने वाले हैं। उनमें से एक पिछले साल अपने परिवार के साथ रायपुर शिफ्ट हो गया था। जांच में सामने आया कि दोनों लड़के ऑनलाइन हिंसक गेम खेलते समय ही आतंकियों के संपर्क में आए। ISIS मॉड्यूल के सदस्यों ने अलग-अलग फेक आईडी बनाकर बच्चों को भरोसे में लिया, फिर धीरे-धीरे उन्हें देशविरोधी गतिविधियों की ओर उकसाने लगे। इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर उन्हें ऐसे गेम भेजे गए जिनमें “काफिरों को कैसे मारना है”, “उन्हें प्रताड़ित करने से सवाब मिलेगा”—जैसी हिंसक और कट्टरपंथी सोच भरी पड़ी थी। इसी के बहाने आतंकियों ने दोनों को अपने प्रभाव में ले लिया।
जांच में यह भी सामने आया है कि ISIS मॉड्यूल ने उन्हें पकड़े जाने से बचने के लिए पूरी तरह डार्क वेब और इनक्रिप्टेड साइट्स का इस्तेमाल करना सिखाया। दोनों बच्चे महीनों तक इन साइट्स के जरिए आतंकियों से बात करते रहे और किसी भी तरह की निगरानी से बचते रहे। उनके परिवारों को इस बात की बिल्कुल जानकारी नहीं थी कि उनके बच्चे किस तरह के नेटवर्क में जा चुके हैं। पढ़ाई के बहाने उन्हें मोबाइल और लैपटॉप दिए गए थे, जिनका इस्तेमाल वे सीधे-सीधे संपर्क के लिए कर रहे थे।
खुफिया सूत्र बताते हैं कि चार से पांच साल तक संपर्क में रहने के बाद दोनों नाबालिग लगभग पूरी तरह कट्टरपंथी बन चुके थे। उनके व्यवहार में तेजी से बदलाव आया था और वे बेहद एरोगेंट और संवेदनहीन हो गए थे। संसाधन मिलते ही किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की क्षमता तक उनमें विकसित हो चुकी थी। यही वजह थी कि पाक मॉड्यूल के आतंकियों ने उन्हें सक्रिय हमले की योजना में शामिल करना शुरू कर दिया था और उनके मन में भारत के प्रति गहरी नफरत भर दी गई थी।
चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों किशोर ISIS के इशारे पर सौ से ज्यादा लड़कों का एक बड़ा नेटवर्क बना चुके थे। एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उस ग्रुप में कौन-कौन शामिल है और वे किन-किन राज्यों से जुड़े हैं। यह भी जांच का विषय है कि उनमें से कितने लोग पहले से प्रभावित हो चुके हैं।
करीब दो साल पहले suspicious activity मिलने पर एटीएस ने इन दोनों लड़कों से पूछताछ भी की थी। इसके बाद एजेंसी ने उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर गुप्त रूप से निगरानी बढ़ा दी। पूछताछ के बाद दोनों नाबालिग और ज्यादा सतर्क हो गए और ट्रेस न होने वाली इनक्रिप्टेड साइट्स पर पूरी तरह शिफ्ट हो गए। हालांकि तकनीकी साक्ष्य जुटाने के बाद एटीएस अंततः इन साइट्स को क्रैक करने में सफल रही और दोनों को हिरासत में ले लिया।
सूत्रों की मानें तो “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भी दोनों लड़के आतंकियों के साथ संपर्क में थे और सुरक्षाबलों की मूवमेंट से जुड़ी जानकारी इकट्ठा कर रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर वे उन जानकारियों को आगे ISIS मॉड्यूल तक पहुंचा रहे थे, जो किसी भी समय सुरक्षा बलों के खिलाफ बड़े खतरे में बदल सकती थीं।
छत्तीसगढ़ में नाबालिगों को इस तरह कट्टरपंथी बनाने की यह पहली घटना है, और एटीएस इसे आतंकियों की नई और अधिक खतरनाक रणनीति मान रही है।