लाल किला ब्लास्ट के बाद जांच की आंच अल-फलाह यूनिवर्सिटी तक, इंडियन मुजाहिद्दीन के कुख्यात सदस्य मिर्ज़ा शादाब बेग के इस कैंपस से जुड़े होने का बड़ा खुलासा।
दिल्ली के लाल किले के पास हुए हालिया धमाके के बाद जांच एजेंसियां अब अल-फलाह यूनिवर्सिटी को पूरी तरह रडार पर ले चुकी हैं। डॉक्टर उमर नबी की गिरफ्तारी के बाद सामने आए आतंक संबंधी सुरागों से इस यूनिवर्सिटी के कई छात्रों की संदिग्ध गतिविधियाँ बाहर आ चुकी हैं। अब जांच में एक और बड़ा नाम सामने आया है—इंडियन मुजाहिद्दीन का मोस्ट वांटेड और 17 साल से फरार मिर्ज़ा शादाब बेग। एजेंसियों ने पुष्टि की है कि शादाब बेग इसी यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग कर चुका है और अपने स्टूडेंट लाइफ के दौरान ही कई बड़े ब्लास्ट की प्लानिंग में शामिल था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शादाब ने 2008 में फरीदाबाद की अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक पूरा किया था। इसी साल अहमदाबाद में हुए सीरियल धमाकों में उसका नाम पहली बार उभरा और बाद में यह साफ हुआ कि पढ़ाई के बीच ही वह आतंकियों के साथ मिलकर हमलों की साजिश रच रहा था। माना जाता है कि शादाब बेग पिछले 17 वर्षों से फरार है और उसकी संभावित लोकेशन अफगानिस्तान मानी जाती है, हालांकि उसका कोई ठोस सुराग अब तक हाथ नहीं लग पाया है।
जांच में यह भी सामने आया है कि शादाब बम बनाने में एक्सपर्ट था। इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग की जानकारी ने उसे तकनीकी रूप से दक्ष बना दिया था और यही वजह थी कि वह इंडियन मुजाहिद्दीन के बम मॉड्यूल के सबसे सक्रिय सदस्यों में गिना जाता था। बताया गया है कि जयपुर ब्लास्ट से पहले वह उडुपी गया था, जहां उसने रियाज और यासीन भटकल को भारी मात्रा में डेटोनेटर और बेयरिंग मुहैया कराए।
2007 के गोरखपुर ब्लास्ट में भी उसका नाम सामने आया, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। उसके बाद से ही वह लगातार फरार है। भारतीय एजेंसियों ने उस पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा है, लेकिन मिर्ज़ा शादाब बेग अब तक गिरफ्त से दूर है।
लाल किला ब्लास्ट के बाद लगातार हो रहे खुलासे यह संकेत दे रहे हैं कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी लंबे समय से कई संदिग्ध गतिविधियों का अड्डा बनी रही है। अब एजेंसियां इस यूनिवर्सिटी के छात्रों, पूर्व छात्रों और फैकल्टी के लिंक की गहराई से जांच कर रही हैं।