हमारा शरीर स्वस्थ रहने के लिए कई तरह के विटामिन, मिनरल, प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्वों पर निर्भर करता है। जब ये तत्व डाइट से पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते या शरीर इन्हें सही तरह से एब्ज़ॉर्ब नहीं कर पाता, तो धीरे-धीरे इसके संकेत दिखने लगते हैं। शुरुआती लक्षण मामूली लग सकते हैं—जैसे बार-बार थकान, बालों का झड़ना, त्वचा का सूखना या हड्डियों में खिंचाव—लेकिन इन्हें अनदेखा करने पर आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
न्यूट्रिएंट डेफिशिएंसी समय पर पहचान ली जाए तो केवल डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करके इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। आज जरूरत की खबर में जानिए—शरीर में विटामिन और मिनरल की कमी कैसे पहचानें, कौन-सा लक्षण किस पोषक तत्व की कमी बताता है और इसे पूरा कैसे करें।
न्यूट्रिएंट डेफिशिएंसी के प्रमुख संकेत
सीनियर डाइटीशियन डॉ. पूनम तिवारी के अनुसार शरीर कई शुरुआती संकेतों के जरिए कमी का संकेत देता है—
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लगातार थकान → आयरन, B12, फोलेट, मैग्नीशियम की कमी
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बालों का झड़ना → आयरन, विटामिन D, जिंक, प्रोटीन, बायोटिन
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नाखून टूटना → आयरन, कैल्शियम, जिंक
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मसूड़ों से खून, मुंह में छाले → विटामिन C, B-कॉम्प्लेक्स, आयरन
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चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग → विटामिन D, B12, ओमेगा-3, मैग्नीशियम
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भूख कम लगना → जिंक, B-कॉम्प्लेक्स, आयरन
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घाव देर से भरना → विटामिन C, जिंक, प्रोटीन
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पैरों में जलन/झुनझुनी → विटामिन B12, B1, B6
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हड्डियों में दर्द → विटामिन D, कैल्शियम, फॉस्फोरस
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अनियमित हार्ट रेट → पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम
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रात को धुंधला दिखना → विटामिन A की कमी
ये शुरुआती चेतावनी संकेत होते हैं। पक्की जानकारी के लिए ब्लड टेस्ट जरूरी है।
डाइट से कैसे पूरी करें विटामिन और मिनरल की कमी?
आयरन, फोलेट और विटामिन K के लिए
हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, सरसों, मेथी, बथुआ), चुकंदर, हरी मटर, सहजन की पत्तियां।
प्रोटीन के लिए
दालें, राजमा, चना, लोबिया, सोयाबीन, पनीर, टोफू, क्विनोआ, बाजरा, ज्वार, रागी।
कैल्शियम के लिए
दूध, दही, पनीर, तिल, भुने चने।
विटामिन B12 के लिए
अंडे, मछली, फोर्टिफाइड सीरियल, फोर्टिफाइड प्लांट-मिल्क।
विटामिन C और एंटीऑक्सिडेंट्स के लिए
आंवला, संतरा, अमरूद, कीवी, पपीता, स्ट्रॉबेरी, ब्रॉकली, शिमला मिर्च।
ओमेगा-3 और हेल्दी फैट्स के लिए
बादाम, अखरोट, काजू, फ्लैक्ससीड, चिया सीड, पंपकिन सीड, फैटी फिश।
विटामिन D और B-कॉम्प्लेक्स के लिए
अंडे की जर्दी, मछली, ओट्स, साबुत अनाज, मशरूम।
हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस के लिए
नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और पानी वाले फल।
कौन-कौन लोग ज्यादा जोखिम में होते हैं?
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बुजुर्ग
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प्रेग्नेंट महिलाएं
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शाकाहारी या सीमित भोजन लेने वाले लोग
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असंतुलित डाइट वाले युवा
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लंबे समय से बीमार या दवाइयां लेने वाले लोग
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कमजोर गट हेल्थ वाले लोग
कमी से बचने के लिए क्या करें?
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रोजाना संतुलित भोजन लें—विटामिन, मिनरल, प्रोटीन, फाइबर सब शामिल करें।
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धूप का सेवन करें ताकि विटामिन D स्वाभाविक रूप से बने।
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पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं।
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प्रोसेस्ड, जंक और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों से बचें।
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भोजन को ओवरकुक न करें—कई विटामिन नष्ट हो जाते हैं।
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गट हेल्थ सुधारने के लिए दही, छाछ, फाइबर और प्रोबायोटिक्स लें।
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समय-समय पर ब्लड टेस्ट कराते रहें।
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जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें।