कोहरे से थमेगी रेलयात्रा – देशभर में 247 ट्रेनें 50 से 90 दिन तक रद्द, 2 करोड़ यात्री प्रभावित

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इस बार ठंड ने नवंबर से ही अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। रात में ओस, धुंध और कई इलाकों में शीतलहर ने हालात ऐसे बना दिए हैं, जैसे दिसंबर और जनवरी की सर्द हवाएँ पहले ही दस्तक दे चुकी हों। उत्तर भारत में कोहरा अभी से घिरना शुरू हो गया है, जबकि सामान्य तौर पर यह दिसंबर के मध्य में बढ़ता है। इसी अनिश्चित मौसम की वजह से भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लेते हुए देशभर की 247 ट्रेनों को लंबे समय के लिए रद्द करने का आदेश जारी कर दिया है।

इन ट्रेनों में कुछ 50 दिन के लिए, कुछ 60 दिन के लिए और कुछ 90 दिन तक पूरी तरह बंद रहेंगी। औसतन हर ट्रेन दो महीने तक बंद मानी जाए तो कुल मिलाकर 247 ट्रेनों के लगभग 14,820 फेरे रद्द होंगे। इसका सीधा असर उन करोड़ों यात्रियों पर पड़ेगा जो सर्दियों में घर वापसी, त्योहार, स्कूल-कॉलेज की छुट्टियां या कामकाज के लिए यात्रा करते हैं। अनुमान है कि इस निर्णय से लगभग 2 करोड़ से ज्यादा लोग यात्रा नहीं कर पाएंगे।

रेलवे ने इन ट्रेनों के आरक्षण पर पहले ही रोक लगा दी है। कई ट्रेनों में बुकिंग पूरी तरह ब्लॉक कर दी गई है, ताकि यात्रियों को अचानक रद्दीकरण का सामना न करना पड़े। कोहरे के कारण सबसे ज्यादा असर उन इलाकों पर पड़ेगा जहां सर्दियों में दृश्यता सबसे अधिक घटती है—जैसे पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर के हिस्से।

रेलवे के सात बड़े जोनों की ट्रेनों पर इस मौसम का प्रभाव पड़ा है। इनमें उत्तरी रेलवे की 89 ट्रेनें, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे की 80 ट्रेनें, नॉर्थ सेंट्रल की 14, नॉर्थ वेस्टर्न की 12, नॉर्थ फ्रंटियर की 30, ईस्टर्न रेलवे की 15 और साउथ ईस्ट रेलवे की 7 ट्रेनें शामिल हैं। इन सबको अलग-अलग अवधि के लिए रद्द कर दिया गया है।

लंबी दूरी की एक सामान्य ट्रेन में शुरू से अंत तक लगभग 1500 यात्री सफर करते हैं। इसी आधार पर गणना की जाए तो इन रद्द ट्रेनों के कारण लगभग 2 करोड़ 22 लाख से अधिक यात्रियों की यात्रा प्रभावित होगी। यह सर्दियों में रेलवे की अब तक की सबसे बड़ी ऑपरेशनल कटौती में से एक मानी जा रही है।

मौसम जितना बिगड़ रहा है, उतना ही रेलकर्मियों का जोर सुरक्षा पर बढ़ गया है। कोहरे में ट्रेन की गति घटानी पड़ती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ट्रेनों को लंबे समय के लिए रोक देना रेलवे के लिए एक मजबूरी बन गया है। इस फैसले से जहां यात्रियों को दिक्कत होगी, वहीं रेल संचालन को सुरक्षित रखने में यह कदम बड़ी भूमिका निभाएगा।

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