भारत के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हो सकता है, क्योंकि कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी का अंतिम फैसला आज शाम 6 बजे घोषित किया जाएगा। इस घोषणा के लिए स्कॉटलैंड के ग्लासगो में कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स एग्जीक्यूटिव बोर्ड की बैठक जारी है और भारत की ओर से गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल वहां पहुंच चुका है। इससे पहले 15 अक्टूबर को बोर्ड अहमदाबाद को 2030 गेम्स के लिए आधिकारिक रूप से नॉमिनेट कर चुका था। नाइजीरिया के अबुजा की दावेदारी भी सामने थी, लेकिन बोर्ड ने नाइजीरिया को 2034 संस्करण के लिए समर्थन देने का संकेत देकर भारत की संभावनाओं को और मजबूत कर दिया।
भारत ने इससे पहले 2010 में दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजित किए थे, जिन पर लगभग 70,000 करोड़ रुपये का भारी खर्च आया था। अहमदाबाद की दावेदारी को मजबूत करने के लिए कॉमनवेल्थ की टीम दो बार गुजरात का दौरा कर चुकी है और शहर के स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर तथा तैयारियों की विस्तृत समीक्षा कर चुकी है। जून 2025 में भारतीय प्रतिनिधियों ने लंदन में हुए प्रेजेंटेशन के बाद केंद्र सरकार के साथ बातचीत की और इसके बाद सरकार ने आधिकारिक रूप से 2030 के लिए बोली लगाने को मंजूरी दी। 29 अगस्त 2025 को राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर हर्ष संघवी, पीटी उषा और अन्य प्रमुख अधिकारियों ने लंदन में आधिकारिक बिड जमा की थी। बोली में अहमदाबाद को एक आधुनिक, स्मार्ट, कॉम्पैक्ट और उच्च मानकों वाले स्पोर्ट्स सिटी के रूप में पेश किया गया है, जहां खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं मौजूद हैं। नरेंद्र मोदी स्टेडियम, नारणपुरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और सरदार पटेल स्पोर्ट्स एंक्लेव को मुख्य वेन्यू के तौर पर प्रस्तावित किया गया है।
कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी किसी भी देश के लिए सिर्फ खेलों का आयोजन नहीं, बल्कि उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा, विकास क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर का भी प्रतीक मानी जाती है। अब तक कुल नौ देश इन खेलों की मेजबानी कर चुके हैं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, भारत, कनाडा और न्यूज़ीलैंड शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया के पास सबसे अधिक पांच बार मेजबानी का रिकॉर्ड भी दर्ज है। 2010 दिल्ली गेम्स में 71 देशों के 6081 खिलाड़ियों ने भाग लिया था और भारत की इस मेजबानी को एक ऐतिहासिक अध्याय माना जाता है। बर्मिंघम में हुए 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 61 मेडल जीते थे, जिनमें 22 गोल्ड भी शामिल थे। कुश्ती, वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स में भारत की मजबूत पकड़ दिखी, जबकि महिला क्रिकेट टीम ने भी सिल्वर मेडल हासिल किया था।
आगामी 2026 ग्लासगो गेम्स भारत के लिए चुनौतीपूर्ण रहेंगे क्योंकि बजट कारणों से शूटिंग, कुश्ती, हॉकी और टी-20 क्रिकेट जैसे महत्वपूर्ण इवेंट्स को हटा दिया गया है, जो हमेशा भारत की मेडल टैली को मजबूती देते आए हैं। इसी वजह से भारत को 2030 की मेजबानी मिलने की उम्मीद और भी खास हो जाती है, क्योंकि मेजबान देश के रूप में भारत के पास कार्यक्रम में अपने प्रमुख खेल शामिल कराने का अधिकार होगा।
यदि अहमदाबाद को 2030 की मेजबानी मिलती है, तो यह पहली बार होगा जब भारत में दिल्ली के बाहर किसी शहर में इतना बड़ा अंतरराष्ट्रीय मल्टी-स्पोर्ट्स आयोजन होगा। इससे पहले 1951 और 1982 के एशियन गेम्स तथा 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स दिल्ली में ही आयोजित हुए थे। इसलिए अहमदाबाद के लिए यह अवसर न सिर्फ गुजरात बल्कि पूरे देश के खेल भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
कॉमनवेल्थ गेम्स का इतिहास भी इसे खास बनाता है। 1930 में कनाडा के हैमिल्टन शहर से इसकी शुरुआत ब्रिटिश एम्पायर गेम्स के नाम से हुई थी और 1978 में इसका नाम बदलकर कॉमनवेल्थ गेम्स कर दिया गया। 2030 का आयोजन इन खेलों के 100 साल पूरे होने का प्रतीक होगा, और यदि भारत को यह मौका मिलता है तो यह वर्ष भारतीय खेल इतिहास के लिए स्वर्णिम अध्याय बन सकता है।