भारत की टेस्ट क्रिकेट में लगातार गिरावट अब सिर्फ फैंस को ही परेशान नहीं कर रही, बल्कि खिलाड़ियों के परिवार भी खुलकर अपनी नाराज़गी जाहिर करने लगे हैं। विराट कोहली के भाई विकास कोहली ने टीम इंडिया की खराब फॉर्म के लिए सीधा निशाना हेड कोच गौतम गंभीर और चीफ सेलेक्टर अजित अगरकर पर साधा है। विकास ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट कर टीम की रणनीति पर सवाल खड़े किए। बाद में हालांकि उन्होंने पोस्ट डिलीट कर दिए, लेकिन इससे नई बहस छिड़ गई है।
भारत की टेस्ट टीम एक दशक से ज्यादा समय तक घर में लगभग अजेय रही है। दिसंबर 2012 से अक्टूबर 2024 तक टीम इंडिया ने कोई भी घरेलू टेस्ट सीरीज नहीं गंवाई। विराट कोहली की कप्तानी में टीम ने आक्रामक, आत्मविश्वासी और नतीजे देने वाली क्रिकेट खेली। इसी दौर में भारत ने ऑस्ट्रेलिया में लगातार दो बार बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीतकर इतिहास रचा। रोहित शर्मा के नेतृत्व में भी टीम का यह दबदबा जारी रहा। लेकिन गंभीर की कोचिंग में टीम का ट्रैक बदलता दिख रहा है।
गंभीर के कार्यकाल में भारत ऐसी हारें झेल रहा है जिन्हें पहले अकल्पनीय माना जाता था। न्यूजीलैंड के हाथों 0-3 की करारी हार, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट में 30 रन की पराजय और अब गुवाहाटी टेस्ट गंवाने का संकट—इन सबने फैंस की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि गंभीर की शुरुआत बांग्लादेश पर 2-0 की जीत से हुई थी, लेकिन उसके बाद प्रदर्शन में लगातार गिरावट आई है।
विकास कोहली की ओर से किए गए पोस्ट में टीम के चयन और प्रयोगों पर जमकर सवाल उठाए गए। उन्होंने लिखा कि भारत ने अपने सीनियर बल्लेबाजों को किनारे कर दिया है, टॉप ऑर्डर में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं और टीम संतुलन ऑलराउंडरों पर जोर देकर बिगाड़ा जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विराट कोहली और रोहित शर्मा को टेस्ट सेटअप से हटाने जैसा कदम टीम के लिए नुकसानदायक साबित हुआ है।
विकास ने टीम की तुलना दक्षिण अफ्रीका से करते हुए कहा कि अफ्रीकी टीम अब भी परंपरागत टेस्ट कॉम्बिनेशन—स्पेशलिस्ट बल्लेबाज, स्पेशलिस्ट गेंदबाज और एक ऑलराउंडर—के साथ खेल रही है, जबकि भारत लगातार ऐसे प्रयोगों से गुजर रहा है जो उल्टा असर दिखा रहे हैं। उनका कहना था कि जो चीज़ टूटी नहीं थी, उसमें छेड़छाड़ की गई और अब नतीजे सबके सामने हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए लिखा—“जब आप बॉस बनने की कोशिश करते हैं, तो टीम को कीमत चुकानी पड़ती है।” विकास ने यह भी सवाल उठाया कि जो टीम विदेशी परिस्थितियों में जीतने का इरादा लेकर उतरती थी, वह अब भारतीय कंडीशंस में मैच बचाने की सोच के साथ क्यों खेल रही है?
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में 1-3 की हार, न्यूजीलैंड के खिलाफ शर्मनाक प्रदर्शन और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जारी संघर्ष ने यह साफ कर दिया है कि टीम इंडिया की रफ्तार कहीं न कहीं टूट चुकी है। अब बड़ा सवाल है कि चयन में लगातार बदलाव और सीनियर खिलाड़ियों को बाहर रखने की रणनीति क्या वास्तव में टीम के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है?