वॉशिंगटन डीसी में हुए ताजा आतंकी हमले के बाद अमेरिका की राजनीति एक बार फिर उबलने लगी है। घटना में अफगान मूल के हमलावर द्वारा दो नेशनल गार्ड सैनिकों पर की गई गोलीबारी में एक सैनिक की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने के बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए देश की प्रवास नीतियों में बड़ा बदलाव करने का संकेत दिया है। हमलावर रहमानुल्लाह लकनवाल की पहचान 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिका पहुंचे एक प्रवासी के रूप में हुई है, जिसने इस हमले को अंजाम दिया।
घटना के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लंबा संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका अब उन प्रवासियों को तुरंत देश से बाहर करेगा जो अपराध में शामिल पाए जाएं, सुरक्षा के लिए खतरा बनें या फिर सरकारी संसाधनों पर बोझ माने जाएं। उन्होंने यह भी लिखा कि अवैध रूप से प्रवेश करने वाले प्रवासियों के सभी दस्तावेज रद्द किए जाएंगे और परिस्थितियों में जरूरत पड़ी तो उनकी नागरिकता तक वापस ले ली जाएगी। ट्रंप ने साफ कहा कि तीसरी दुनिया के देशों से आने वाली अनियंत्रित प्रवासन प्रक्रिया अमेरिका के लिए लंबे समय से खतरा बनी हुई है और अब इसे स्थायी तौर पर रोकने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने गैर-अमेरिकी प्रवासियों को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी और आर्थिक सहायता भी बंद करने की चेतावनी दी। उनका कहना था कि अपराध, बेरोजगारी और सामाजिक तनाव की जड़ें आज जिस तरह फैल रही हैं, उसके पीछे बड़ी संख्या में अवैध प्रवासियों का निरंतर बढ़ता दबाव जिम्मेदार है। ट्रंप का बयान आते ही राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है और देशभर में इमिग्रेशन को लेकर बहस नए सिरे से शुरू हो गई है।
वॉशिंगटन हमले के बाद USCIS यानी यूनाइटेड स्टेट्स सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस ने तत्काल कदम उठाते हुए 19 देशों से आने वाले इमिग्रेशन आवेदनों की स्क्रीनिंग और अधिक सख्त कर दी है। अब आवेदन की प्रक्रिया में हर देश की राजनीतिक स्थिति, सुरक्षा जोखिम और संभावित खतरे का स्तर महत्वपूर्ण पैरामीटर होगा। इससे स्पष्ट है कि अमेरिकी एजेंसियां प्रवास से जुड़े सभी मामलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की दिशा में बढ़ रही हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरी स्थिति का ठीकरा सीधे मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन और उनकी प्रशासनिक नीतियों पर फोड़ा। उनका कहना है कि बाइडन सरकार ने लाखों प्रवासियों को बिना उचित जांच-पड़ताल के देश में प्रवेश दिया, और आज देश उसी लापरवाही की कीमत चुका रहा है। उनके अनुसार यह सिर्फ एक सुरक्षा घटना नहीं, बल्कि बाइडन प्रशासन की विफल प्रवासन नीति का नतीजा है।
इस पूरे प्रकरण के बाद अमेरिका में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और राजनीतिक गलियारों में टकराव और गहरा हो गया है। प्रवासन नीति, सुरक्षा और नागरिकता नियमों पर आने वाले दिनों में बड़ा टकराव दिखना तय माना जा रहा है।