मुंबई में रहने वाले 72 वर्षीय बिजनेसमैन भरत हरखचंद शाह के साथ हुआ ट्रेडिंग फ्रॉड सिर्फ एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि ऐसा झटका है जिसने उनके जीवन भर की जमा-पूँजी को चंद क्लिक में खत्म कर दिया। भरतभाई के पिता ने 70–80 के दशक में अच्छे-खासे शेयर खरीदे थे। मार्केट की समझ भरतभाई को ज्यादा नहीं थी, लेकिन डिविडेंड आता रहता था इसलिए कभी चिंता नहीं की। 2020 में मुलाकात हुई एक पुराने दोस्त से, जिसने जिंदगी बदल देने वाला सुझाव दिया—“ग्लोब कैपिटल नाम की बेहतरीन ब्रोकरेज फर्म है, अपने शेयर कोलैटरल रख दो, ये लोग आपके लिए ट्रेडिंग करेंगे… हर साल 15–18% का गारंटीड प्रॉफिट मिलेगा।”
बस यही वह क्षण था जब भरोसा टूटा और 35 करोड़ के फ्रॉड की नींव पड़ गई।
भरतभाई और उनकी पत्नी ने ग्लोब कैपिटल में खाते खोल दिए। फर्म के दो कर्मचारी—अक्षय बरिया और करण सिरोया—घर आने लगे और खुद को ‘पर्सनल गाइड’ बताने लगे। उन्होंने भरतभाई को बस एक बात सिखाई: “अंकल, जब भी OTP आए, हमें बता देना। बाकी सब हम संभाल लेंगे।” धीरे-धीरे उन्होंने अकाउंट का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। मार्च 2020 से जून 2024 तक हजारों करोड़ों के F&O ट्रेड हुए—ज्यादातर भारी नुकसान में। लेकिन भरतभाई को हर साल ईमेल पर PDF आती रही जिसमें लिखा होता—“18.4% का रिटर्न, पोर्टफोलियो इतना बढ़ गया।”
फर्जी स्टेटमेंट्स ने चार साल तक सच को ढका रखा। असलियत किसी को पता ही नहीं चली।
और फिर आया जुलाई 2024 का काला दिन—सुबह 10 बजे फोन आया: “भरत शाह जी, आपके और आपकी पत्नी के अकाउंट में 35 करोड़ का डेबिट बैलेंस है। 48 घंटे में पैसा नहीं दिया तो सारे शेयर बेच दिए जाएंगे।” भरतभाई के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने कहा, “डेबिट कैसे? हमें तो प्रॉफिट बताया जा रहा था।” जवाब आया—“अंकल, आप रोज F&O ट्रेड कर रहे थे… भारी नुकसान हुआ है।”
भरतभाई ब्रोकरेज ऑफिस पहुंचे। वहां असली स्टेटमेंट सामने रखी गई—कई दिनों 5–10 करोड़ के ट्रेड, ज्यादातर लॉस में। उन्होंने अपने कंप्यूटर से ग्लोब कैपिटल में लॉगिन किया और असली रिपोर्ट डाउनलोड की… और उसी पल समझ आ गया कि वर्षों से जो ईमेल आती थी—वो फर्जी थी। खाते में तो कुछ भी नहीं बचा था।
शॉक में डूबे भरतभाई घर लौटे। बच्चों को बुलाया। बचे हुए शेयर बेचने पड़े और पूरे 35 करोड़ चुकाने पड़े—तभी जाकर कंपनी ने बाकी शेयरों को बेचने से रोका। यह नुकसान न सिर्फ आर्थिक था, बल्कि भावनात्मक और मानसिक रूप से तोड़ देने वाला भी।
शाह ने वनराई पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। IPC की धारा 409 (क्रिमिनल ब्रेक ऑफ ट्रस्ट) और 420 (चीटिंग) सहित कई धाराओं में FIR हुई। अब मामला मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के पास है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि अनऑथराइज्ड ट्रेडिंग कर्मचारियों ने ही की। OTP के नाम पर अकाउंट्स पर पूरा कंट्रोल ले लिया गया था। पुलिस सूत्र बताते हैं कि ऐसे मामलों में सीनियर सिटीजन्स अक्सर आसान निशाना बनते हैं क्योंकि वे टेक्निकल चीजों और मार्केट के जोखिमों से दूर रहते हैं।
अब EOW हजारों ट्रेड्स, ईमेल हिस्ट्री, फर्जी स्टेटमेंट्स और सिस्टम लॉग्स का विश्लेषण कर रही है। यह सिर्फ एक परिवार का नुकसान नहीं, बल्कि उन सारे सीनियर सिटीजन्स के लिए चेतावनी है जो अपने लक्ष्मी समान शेयर वर्षों तक संभालकर रखते हैं—और गलत भरोसे में उन्हें किसी और के हाथ सौंप देते हैं।