क्या वनडे में टेस्ट की कड़वी याद का जवाब दे पाएगी टीम इंडिया? रोहित–कोहली की वापसी से बढ़ी ताकत, साउथ अफ्रीका की 10 साल से भारत में नहीं लगी है सीरीज

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भारत और साउथ अफ्रीका के बीच टेस्ट सीरीज ने भारतीय फैंस को बड़ा झटका दिया था। 25 साल बाद प्रोटियाज टीम ने भारतीय जमीन पर टेस्ट सीरीज जीती और वह भी 2-0 के क्लीन स्वीप के साथ। अब कहानी नया मोड़ लेने जा रही है, क्योंकि 30 नवंबर से रांची में तीन मैचों की वनडे सीरीज शुरू हो रही है—जहाँ रोहित शर्मा और विराट कोहली की वापसी टीम इंडिया को पूरी तरह नया रूप देती नज़र आ रही है। टेस्ट में मिली करारी हार का हिसाब चुकाने का यह सबसे बड़ा मौका माना जा रहा है।

टी-20 वर्ल्ड कप का हिसाब साउथ अफ्रीका ने टेस्ट में बराबर किया था। 2024 के फाइनल में भारत ने प्रोटियाज को हराकर चौथा लिमिटेड ओवर्स वर्ल्ड खिताब जीता था। लेकिन करीब डेढ़ साल बाद जब दोनों टीमें टेस्ट में टकराईं तो साउथ अफ्रीका ने भारत को उन्हीं की जमीन पर धूल चटाकर अपना हिसाब साफ कर लिया। उल्लेखनीय बात यह है कि साउथ अफ्रीका को भारत में आखिरी सीरीज जीत 2000 में मिली थी। उसके बाद 5 टेस्ट सीरीज खेलीं—तीन गंवाईं, दो ड्रॉ कराईं। इस 25 साल पुराने दबदबे को खत्म करते हुए उन्होंने इतिहास पलट दिया। अब वनडे की बारी है, जहाँ भारत के पास 3-0 से जीत हासिल कर टेस्ट के जख्म को हल्का करने का अवसर मौजूद है।

वनडे रिकॉर्ड की बात करें तो हेड-टु-हेड में साउथ अफ्रीका आगे है। दोनों के बीच कुल 58 मुकाबले हुए हैं, जिनमें भारत ने 27 और साउथ अफ्रीका ने 30 मैच जीते हैं—एक मैच बेनतीजा रहा। इसलिए भारत अगर इस सीरीज में क्लीन स्वीप कर देता है तो वनडे में दोनों टीमों का जीत–हार का हिसाब बराबर हो जाएगा। सीरीज के रिकॉर्ड में भारत पहले से आगे है—15 वनडे सीरीज में भारत 8 बार जीता है, जबकि अफ्रीका सिर्फ 6 बार। पिछली भिड़ंत 2023 में हुई थी, जहाँ भारत ने 2-1 से सीरीज अपने नाम की थी।

भारत में खेले गए मैचों का रिकॉर्ड भी दिलचस्प है। कुल 24 वनडे में भारत 14 बार जीता है और अफ्रीका 10 बार। लेकिन सीरीज जीत की बात आए तो यहाँ भारत लगभग अजेय रहा है—दोनों टीमों ने भारत में 7 सीरीज खेली हैं, जिनमें 5 भारत के नाम हैं, एक साउथ अफ्रीका के और एक ड्रॉ। प्रोटियाज की इकलौती जीत 2015 में आई थी, जब एबी डिविलियर्स की कप्तानी में उन्होंने 3-2 से जीत हासिल की थी।

भारत का घरेलू रिकॉर्ड पिछले 15 वर्षों में किसी दीवार की तरह खड़ा है। जनवरी 2011 के बाद से भारत को घर पर हराना वनडे और टी-20 में बेहद मुश्किल साबित हुआ है। 118 वनडे में 84 जीत और केवल 31 हार, जिसमें 71% का विजयी प्रतिशत शामिल है। यानी होमग्राउंड पर टीम इंडिया अजेय रूप में नज़र आती है।

इस बार रोहित शर्मा और विराट कोहली की मौजूदगी टीम की रीढ़ मानी जा रही है, खासतौर पर इसलिए क्योंकि शुभमन गिल, श्रेयस अय्यर और जसप्रीत बुमराह इस सीरीज का हिस्सा नहीं हैं। कप्तानी केएल राहुल संभालेंगे और उनके साथ रोहित–कोहली दोनों भारतीय परिस्थितियों में रन बनाने के मशीन साबित हुए हैं। विराट कोहली तो भारत में सर्वाधिक वनडे शतक लगाने वाले खिलाड़ी हैं—24 सेंचुरी के साथ उन्होंने सचिन तेंदुलकर (20) को पीछे छोड़ा है। रोहित 14 शतकों के साथ तीसरे नंबर पर हैं। कोहली भारत में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी भी हैं और सचिन के रिकॉर्ड से सिर्फ 652 रन दूर हैं।

यह वनडे सीरीज सिर्फ हिसाब बराबर करने का मौका नहीं, बल्कि 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी का हिस्सा भी है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज भले 2-1 से हारी हो, लेकिन कोहली और रोहित ने फॉर्म दिखाया। आने वाले वनडे मैचों को मिलाकर भारत के पास वर्ल्ड कप तक 21 मैच हैं, जिनसे टीम अपनी परफेक्ट प्लेइंग कॉम्बिनेशन तैयार करेगी। जिन महत्वपूर्ण खिलाड़ियों की इस समय गैरमौजूदगी है, उनसे बने गैप भरने के लिए बैकअप खिलाड़ियों को आजमाने का यह सही समय है।

भारत की संभावित प्लेइंग-11
रोहित शर्मा, यशस्वी जायसवाल, विराट कोहली, ऋतुराज गायकवाड/तिलक वर्मा, केएल राहुल (कप्तान/विकेटकीपर), नीतीश रेड्डी, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा।

वनडे में भारत के सामने बदला लेने का मौका भी है और भविष्य के वर्ल्ड कप की तैयारी का भी। अब देखने वाली बात यह होगी कि रोहित और कोहली की वापसी टीम इंडिया को टेस्ट की हार भुलाने में कितनी मदद करती है।

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