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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बड़ा बयान: अगली डीजीपी कॉन्फ्रेंस से पहले देश से खत्म हो जाएगा नक्सलवाद—नवा रायपुर में शुरू हुई 60वीं DG-IG कॉन्फ्रेंस में सुरक्षा, भगोड़ों की वापसी और 2047 की पुलिसिंग पर गहन चर्चा

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नवा रायपुर में शुक्रवार से तीन दिवसीय 60वीं डीजीपी–आईजीपी कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी देर शाम रायपुर पहुंच गए और शनिवार-रविवार को कॉन्फ्रेंस की अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। इसी मंच पर देश की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की चुनौतियों, भगोड़ों की वापसी की रणनीति और 2047 की पुलिसिंग के भविष्य का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

पहले दिन की चर्चाओं का मुख्य केंद्र रहा नक्सल प्रभावित इलाकों की सुरक्षा। गृहमंत्री अमित शाह ने यहां एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि अगली डीजीपी कॉन्फ्रेंस से पहले देश से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया हो जाएगा। उन्होंने इसे वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों के उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम बताते हुए कहा कि मार्च 2026 तक यह समस्या इतिहास बन जाएगी। शाह के मुताबिक नक्सलवाद का अंत देश के विकास की पहली नींव है और बस्तर सहित पूरे रेड कॉरिडोर में विकास का नया अध्याय शुरू होने वाला है।

गृहमंत्री ने बताया कि पिछले सात वर्षों में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिसकी बदौलत 2014 में 126 नक्सल प्रभावित जिले घटकर अब केवल 11 रह गए हैं। उन्होंने नॉर्थ-ईस्ट और जम्मू-कश्मीर के सुधारों का भी जिक्र किया और कहा कि पिछले 40 साल से चले आ रहे इन तीन बड़े हॉटस्पॉट्स का समाधान मोदी सरकार की रणनीति का परिणाम है। उन्होंने NIA और UAPA कानूनों को मजबूत किए जाने को भी सुरक्षा ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

अमित शाह ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों को सम्मानित करते हुए कहा कि इंटेलिजेंस की सटीकता, लक्ष्य की स्पष्टता और एक्शन में तालमेल—इन्हीं तीन स्तंभों पर उग्रवाद, कट्टरता और नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा 360 डिग्री तंत्र तैयार किया जा रहा है कि संगठित अपराधियों और ड्रग नेटवर्क को कोई भी जगह न मिल सके।

शनिवार को छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरूण देव गौतम बस्तर 2.0 का विस्तार से खाका पेश करेंगे। इसमें मार्च 2026 के बाद नक्सल मुक्त बस्तर के विकास मॉडल, अंदरूनी इलाकों तक सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं की पहुंच, आदिवासियों का विश्वास जीतने की रणनीति और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास की योजनाओं पर चर्चा होगी। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि पुलिस और सुरक्षा बलों को विकास कार्यों में कैसे जोड़ा जाएगा।

कॉन्फ्रेंस का एक और बड़ा हिस्सा विदेश में बसे भारतीय भगोड़ों—विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, ललित मोदी, जतिन मेहता और संदेशरा ब्रदर्स—को वापस लाने की नई रणनीति पर काम करना है। कई भगोड़ों को अब तक लाया जा चुका है, लेकिन कई अब भी कानून की पहुंच से बाहर हैं। शनिवार को इन भगोड़ों की वापसी के रोडमैप पर विशेष चर्चा होगी।

पहले दिन गृहमंत्री ने देश के टॉप-3 पुलिस स्टेशनों का सम्मान किया—दिल्ली का गाजीपुर, अंडमान-निकोबार का पहरगांव और कर्नाटक के रायचूर जिले का कवितला थाने को 70 कैटेगरी आधारित पैरामीटर्स के आधार पर चुना गया।

सम्मेलन के पहले दिन नक्सल सुरक्षा रणनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों, आपदा प्रबंधन में पुलिस-नागरिक सुरक्षा की भूमिका और पिछले सम्मेलन की सिफारिशों की समीक्षा जैसे कई विषयों पर गहन चर्चा हुई। शनिवार को विजन 2047 के तहत नई पुलिसिंग व्यवस्था, तकनीक के जरिए महिलाओं की सुरक्षा, जन आंदोलनों में कानून-व्यवस्था की रणनीति और फॉरेंसिक के बढ़ते उपयोग जैसे अहम विषयों पर प्रस्तुतियां होंगी।

देश में नक्सलवाद के अंत से लेकर भगोड़ों की वापसी तक—रायपुर में चल रही यह कॉन्फ्रेंस कानून-व्यवस्था के भविष्य को तय करने वाली महत्वपूर्ण बैठक बन गई है।

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