छत्तीसगढ़ के शक्ति क्षेत्र के राजा धर्मेंद्र सिंह को बिलासपुर हाईकोर्ट से सोमवार को बड़ी कानूनी राहत मिली। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए दोषसिद्धि के आदेश को पूरी तरह रद्द करते हुए उन्हें अप्राकृतिक दुष्कर्म के दोनों आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राजा धर्मेंद्र सिंह को जेल से तुरन्त रिहा किया जाए।
क्या थे आरोप?
एक महिला ने राजा धर्मेंद्र सिंह पर अप्राकृतिक रेप का आरोप लगाया था। ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर उन्हें दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी, जिसके बाद वे जेल में बंद थे। मामला शुरू से ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर संवेदनशील माना जा रहा था।
हाईकोर्ट ने क्यों बदला फैसला?
डिवीजन बेंच ने केस डायरी, गवाहों के बयान और सभी साक्ष्यों की व्यापक समीक्षा के बाद पाया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला न्यायिक कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
अदालत ने कहा कि आरोप “संदेह से परे” साबित नहीं हुए और ऐसी स्थिति में दोषसिद्धि टिकाऊ नहीं कही जा सकती। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त कर दिया और राजा धर्मेंद्र सिंह को पूर्णतः बरी करने का आदेश जारी किया।
फैसले के बाद तेज हुई हलचल
राजनीतिक रूप से चर्चित यह मामला शुरुआत से ही सुर्खियों में रहा है। हाईकोर्ट के निर्णय के बाद शक्ति क्षेत्र ही नहीं, पूरे संभाग में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। समर्थकों में खुशी की लहर है, वहीं विपक्ष इस फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दे रहा है।
हाईकोर्ट से मिली यह राहत राजा धर्मेंद्र सिंह के लिए एक बड़ा कानूनी मोड़ साबित हुई है, जबकि क्षेत्र में इसके प्रभाव को लेकर अब नई चर्चाएँ शुरू हो गई हैं।