नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बैंक निफ्टी इंडेक्स में बड़े फेरबदल के ऐलान का असर मंगलवार को शेयर बाजार में साफ दिखा। जैसे ही NSE ने घोषणा की कि बैंक निफ्टी में अब 12 की जगह 14 बैंक शामिल होंगे, यस बैंक और यूनियन बैंक के शेयरों में अचानक तेज़ी आ गई। दोनों स्टॉक्स करीब 3% तक चढ़ गए, जबकि बड़ी निजी बैंकों—HDFC, ICICI और एक्सिस बैंक—के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
यह बदलाव 31 दिसंबर 2025 से प्रभावी होगा। इंडेक्स में शीर्ष तीन बैंकों के वेटेज को क्रमशः 19%, 14% और 10% पर सीमित रखा जाएगा। पहले चर्चा थी कि सबसे अधिक वेटेज 20% तक जा सकता है और शीर्ष तीन का संयुक्त वेटेज 45% से कम रखा जाएगा, लेकिन अंतिम घोषणा में इसे बदला गया।
यस बैंक और यूनियन बैंक को मिल रहा है बड़ा फायदा
मार्केट एक्सपर्ट्स ने पहले ही संकेत दिए थे कि इंडेक्स में शामिल नए छोटे और मिड-कैप बैंकों में भारी इनफ्लो देखने को मिलेगा।
IIFL की रिपोर्ट के मुताबिक—
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ICICI बैंक से लगभग 351 मिलियन डॉलर का आउटफ्लो
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HDFC बैंक से करीब 331 मिलियन डॉलर का आउटफ्लो
होने की संभावना है।
ये आंकड़े दोनों बैंकों के औसत दैनिक वॉल्यूम (ADV) से कहीं अधिक हैं, इसलिए निवेशकों ने इनके शेयरों में आंशिक सेलिंग शुरू की।
वहीं दूसरी ओर—
-यस बैंक में लगभग 115 मिलियन डॉलर
-यूनियन बैंक में करीब 100 मिलियन डॉलर
जितने बड़े इनफ्लो की उम्मीद जताई गई है।
यह इनफ्लो दोनों बैंकों के ADV से लगभग 5 गुना माना जा रहा है, यानी इन स्टॉक्स में आने वाले महीनों में मजबूत लिक्विडिटी देखने की संभावना है।
फेडरल बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को भी इससे अच्छा फायदा मिलने के संकेत हैं। इंडेक्स रिबैलेंसिंग के तहत फंड फ्लो एडजस्टमेंट मार्च 2026 तक चार चरणों में होगी।
नुवामा रिसर्च ने क्या कहा?
नुवामा ने भी इनफ्लो–आउटफ्लो के अनुमान पेश किए—
-यस बैंक में 140 मिलियन डॉलर तक इनफ्लो
-यूनियन बैंक में 109 मिलियन डॉलर तक इनफ्लो
-एचडीएफसी बैंक से 322 मिलियन डॉलर आउटफ्लो
-ICICI बैंक से 348 मिलियन डॉलर आउटफ्लो
इतना बड़ा फंड मूवमेंट शेयर प्राइस पर तुरंत असर डालता है, इसलिए 2 दिसंबर को बाजार में यह बदलाव साफ नज़र आया।
बाजार में तुरंत प्रभाव—बड़े बैंक फिसले, नए दावेदार चढ़े
एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक के शेयर 0.8% से 1.3% तक फिसले।
इंडियन बैंक में 2.5% की गिरावट आई क्योंकि बाजार में उम्मीद थी कि इंडियन बैंक भी बैंक निफ्टी में शामिल होगा, लेकिन वह लिस्ट में जगह नहीं बना सका।
दूसरी तरफ, यस बैंक और यूनियन बैंक में तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींचा। बाजार मान रहा है कि इंडेक्स इनफ्लो के कारण आने वाले महीनों में इन शेयरों की मांग बनी रहेगी।
बॉटम लाइन
बैंक निफ्टी में किए गए इस बदलाव ने एक तरफ जहां बड़े निजी बैंकों पर दबाव बढ़ाया है, वहीं यस बैंक, यूनियन बैंक और अन्य मिड-कैप बैंकों के लिए बड़े निवेश के दरवाजे खोल दिए हैं। जैसे-जैसे रिबैलेंसिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, इन बैंकों के शेयरों में और हलचल देखने को मिल सकती है।