आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज, 3 दिसंबर से शुरू हो गई है। इस बैठक के फैसले 5 दिसंबर को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा घोषित किए जाएंगे। दिलचस्प बात यह है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय अर्थव्यवस्था ने पिछले छह तिमाहियों में सबसे तेज रफ्तार पकड़ ली है और महंगाई भी लगातार घट रही है। ऐसे में लोगों की नज़रें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या इस बार ब्याज दरों में कटौती हो सकती है, जिससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI सस्ती हो सके।
अर्थव्यवस्था में सुधार और कीमतों में नरमी ने उम्मीदों को फिर से जगा दिया है। बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, गिरती मुद्रास्फीति और बेहतर फंडामेंटल्स ने बाजार को आशावादी बनाया है कि RBI अब कठोर रुख से थोड़ा नरम हो सकता है।
आर्थिक अनुमानों में बड़े बदलाव की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार RBI सिर्फ अपनी नीति दर पर ही नहीं, बल्कि आने वाले साल के आर्थिक अनुमानों पर भी संशोधन ला सकता है। वित्त वर्ष 2026 के लिए विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी और महंगाई प्रोजेक्शन में कमी—दोनों की उम्मीद की जा रही है। सितंबर तिमाही की GDP में उम्मीद से तेज बढ़त और अक्टूबर में महंगाई का 0.25% तक गिरना इस बदलाव का बड़ा आधार है। सब्जियों के दाम लगातार नौ महीने गिरे हैं और GST कटौती ने उपभोक्ता कीमतों पर राहत का असर दिखाया है।
महंगाई अनुमान 1.8–2% तक आ सकता है नीचे
विश्लेषक अनुमान लगा रहे हैं कि RBI FY26 के लिए अपनी महंगाई की भविष्यवाणी 2.6% से घटाकर 1.8–2% तक ला सकता है। ऐसा होना बड़ा कदम माना जाएगा क्योंकि यह लगातार तीसरी बार होगा जब RBI महंगाई अनुमान नीचे करेगा। हालांकि CPI में खाद्य उत्पादों का बड़ा हिस्सा होने के कारण अनुमान लगाना चुनौतीपूर्ण रहता है, लेकिन मौजूदा आर्थिक परिस्थितियां इस कटौती को सही ठहराती हैं।
विकास दर अनुमान भी सुधरने की उम्मीद
RBI के आर्थिक अनुमान में विकास दर का आंकड़ा भी ऊपर जा सकता है। 6.8% के मौजूदा अनुमान को बढ़ाकर 7% या उससे भी अधिक किया जा सकता है। कई अर्थशास्त्री तो यहां तक कह रहे हैं कि FY26 की GDP ग्रोथ 7.5% तक जा सकती है। GST कटौती के बाद मांग बढ़ी है, बैंक लोन की ग्रोथ तेज है, टैक्स कलेक्शन मजबूत है और ऑटो-सेक्टर समेत कई क्षेत्रों में सुधार दिख रहा है।
हालांकि निर्यात की कमजोरी और अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ अब भी एक चुनौती बने हुए हैं।
कुल मिलाकर आर्थिक बुनियाद मजबूत
संपूर्ण तस्वीर बताती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति पहले से मजबूत हो रही है और महंगाई नियंत्रण में है। यदि महंगाई आने वाले महीनों में 2% के आसपास स्थिर रहती है, तो अगले दौर में ब्याज दरों में कटौती की संभावना काफी बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर होगा—सस्ती EMI, तेजी से बढ़ती निवेश गतिविधियाँ, और उद्योगों के लिए बेहतर माहौल।
5 दिसंबर को क्या होगा यह अभी कहा नहीं जा सकता, लेकिन संकेत साफ हैं—आने वाले महीनों में आर्थिक राहत की उम्मीद और मजबूत हो रही है, और बाजार इस घोषणा का इंतज़ार सांसें थामकर कर रहा है।