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बीजापुर–दंतेवाड़ा सीमा पर भीषण मुठभेड़, पांच नक्सली ढेर—एक जवान शहीद, गंगालूर के जंगलों में सुबह से गूंज रही गोलियां

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर और दंतेवाड़ा की सीमा से एक बार फिर वही खबर आई है जो इस क्षेत्र की जमी हुई सच्चाई को उघाड़ देती है—जंगलों में गोलियों की आवाज़, जवानों की बहादुरी और नक्सलियों की घात। गंगालूर इलाके में मंगलवार सुबह शुरू हुई यह मुठभेड़ घंटों गुजरने के बाद भी थमी नहीं है। एसपी जितेंद्र यादव के मुताबिक, पिछले दो घंटों से लगातार गोलीबारी जारी है और अब तक पांच माओवादी ढेर किए जा चुके हैं। दुखद खबर यह है कि इस मुठभेड़ में एक वीर जवान शहीद हो गया है, जबकि एक अन्य जवान घायल हुआ है।

गंगालूर के घने जंगलों में चल रही इस कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के बड़े समूह को घेर लिया है, और अनुमान है कि मारे गए माओवादियों की संख्या और बढ़ सकती है। इलाके की भौगोलिक स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है—टीलों, गहरी खाइयों और घने पेड़ों के बीच मुकाबला हमेशा जोखिम से भरा होता है। इसके बावजूद जवानों ने ऑपरेशन के दौरान जमे रहकर पूरे इलाके को जाल की तरह घेर रखा है।

मुठभेड़ की तीव्रता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई बार दोनों ओर से भारी फायरिंग हुई है। सुरक्षा बलों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से इस क्षेत्र में नक्सली मूवमेंट की सूचना मिल रही थी और उसी इनपुट पर टीम को ऑपरेशन के लिए भेजा गया था। दूसरी तरफ नक्सली इस इलाके को लंबे समय से सुरक्षित अड्डे की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं, इसलिए जवानों की कार्रवाई ने उन्हें चौंका दिया है।

जंगलों में गूंजती लगातार गोलीबारी यह बताने के लिए काफी है कि ऑपरेशन अभी समाप्त नहीं हुआ है। सुरक्षा बल इलाके को पूरी तरह काबू में लेने की कोशिश में जुटे हैं। हर मिनट नई स्थिति बन रही है और मुठभेड़ गहराती जा रही है।

छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर यह संघर्ष फिर से याद दिलाता है कि सुरक्षा बल किस चुनौती का सामना करते हैं और हर अभियान में कितना जोखिम उठाते हैं। गंगालूर का यह ऑपरेशन आगे क्या मोड़ लेगा, यह तो आने वाले समय में सामने आएगा, लेकिन फिलहाल जवानों का साहस और बलिदान इस संघर्ष के केंद्र में है।

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