“मोदी–पुतिन की फॉर्च्यूनर डिप्लोमेसी: जब दो वैश्विक नेता यूरोपियन लिमोज़िन छोड़ एक जापानी SUV में साथ बैठे”

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भरोसेमंद प्रदर्शन देती है। इसके यूनिफॉर्म कलर और स्टैंडर्ड लुक की वजह से यह बड़ी आसानी से कन्वॉय में घुल जाती है और VIP मूवमेंट्स को और सुरक्षित बनाती है।

दिलचस्प बात यह भी है कि फॉर्च्यूनर की थर्ड-रो सीटिंग का फायदा भी उठा—क्योंकि इंटरप्रेटर्स को साथ बैठाने के लिए अतिरिक्त जगह चाहिए थी। रेंज रोवर में यह सुविधा नहीं होती, इसलिए जापानी ब्रांड की यह SUV एक प्रैक्टिकल विकल्प साबित हुई।

लेकिन कहानी का एक और पहलू भी है। जब दुनिया यूक्रेन युद्ध को लेकर ध्रुवीकृत है और यूरोप—खासतौर पर यूके और जर्मनी—रूस पर सैंक्शंस थोप रहे हैं, तब पुतिन का किसी यूरोपियन कार में बैठना उनके अपने देश में गलत मैसेज देता। ऐसे में जापानी कार का चयन—जो न अमेरिकी है, न यूरोपियन—एक सूक्ष्म राजनीतिक संकेत भी बन गया। विश्लेषक इसे वेस्ट के लिए एक कूटनीतिक मैसेज बता रहे हैं। “स्मार्ट लोग समझ जाएंगे,”—बीजेपी नेता शहज़ाद पूनावाला का यही तंज इस विमर्श को और दिलचस्प बना देता है।

सोशल मीडिया पर फॉर्च्यूनर मालिकों की खुशी देखते ही बन रही थी—”आज हम भी प्राउड फील कर रहे हैं,” कई यूज़र लिखते दिखे। मीम्स में फॉर्च्यूनर को “डिप्लोमैटिक SUV” का दर्जा तक दे दिया गया। यह नज़र भी सच ही है। फॉर्च्यूनर वैसे भी भारतीय सड़कों पर एक पावर सिंबल बन चुकी है—और अब प्रधानमंत्री व रूसी राष्ट्रपति को लेकर जाना उस पहचान को जैसे एक नई ऊंचाई दे गया।

जिस कार में दोनों लीडर बैठे, वह कर्नाटक के बिदादी प्लांट में बनी सिग्मा 4MT फॉर्च्यूनर है—BS6 मॉडल, ‘मेक इन इंडिया’ की मिसाल और 33.78 लाख से शुरू होने वाली एक ऐसी SUV जो अपने रग्ड नेचर और भरोसे के कारण लाखों भारतीयों की पसंद है।

आखिरकार यह कहानी सिर्फ एक SUV की नहीं, बल्कि उन प्रतीकों की है जो राजनीति और कूटनीति की बारीक भाषा बोलते हैं—चुपचाप, लेकिन दुनिया भर में गूंजते हुए।

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