देश की टॉप-10 कंपनियों के मार्केट वैल्यूएशन में इस हफ्ते दिलचस्प उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दस में से पांच कंपनियों ने मिलकर ₹72,286 करोड़ की वैल्यू बढ़ाई, और इस रेस में सबसे आगे रही TCS, जिसने अकेले ₹35,910 करोड़ की बढ़त दर्ज की और अपना मार्केट कैप बढ़ाकर ₹11.72 लाख करोड़ तक पहुंचा दिया।
इंफोसिस ने भी इस रैली में मजबूत उपस्थिति दर्ज की। कंपनी ने ₹23,405 करोड़ की बढ़त के साथ अपना मार्केट कैप ₹6.71 लाख करोड़ किया। उधर बजाज फाइनेंस ने ₹6,720 करोड़, जबकि एयरटेल ने ₹3,792 करोड़ की वैल्यू जोड़ी और इस फायदे से शेयरहोल्डर्स को राहत मिली।
लेकिन इसी बीच तस्वीर का दूसरा हिस्सा उल्टा रहा। देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू ₹35,117 करोड़ गिर गई और इसका मार्केट कैप घटकर ₹20.85 लाख करोड़ पर आ गया। सरकारी बीमा दिग्गज LIC भी इस लहर में नहीं टिक सकी और उसकी वैल्यू में ₹15,560 करोड़ की गिरावट दर्ज की गई, जिससे उसका मार्केट कैप अब ₹5.50 लाख करोड़ रह गया है।
कुल मिलाकर, एक ही हफ्ते में मार्केट ने यह दिखा दिया कि कैसे कुछ कंपनियां नई ऊंचाइयों पर पहुंच जाती हैं जबकि अन्य कंपनियां दबाव में आ जाती हैं।
मार्केट कैप आखिर होता क्या है?
किसी भी कंपनी के सभी आउटस्टैंडिंग शेयरों का योग—यानी जितने शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं, उनकी कुल वैल्यू—उसे मार्केट कैप कहते हैं। उदाहरण के लिए अगर किसी कंपनी के 1 करोड़ शेयर मार्केट में मौजूद हैं और एक शेयर की कीमत ₹20 है, तो कंपनी की वैल्यू ₹20 करोड़ मानी जाएगी।
और यह वैल्यू कभी भी बदली जा सकती है—शेयर का भाव बढ़ा तो मार्केट कैप ऊपर, और भाव गिरा तो मार्केट कैप भी नीचे।
मार्केट कैप बढ़ने-घटने के मायने
अगर TCS जैसी बड़ी कंपनी का मार्केट कैप बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ती है और कंपनी के पास नए निवेश, लोन या अधिग्रहण के लिए ज्यादा जगह तैयार होती है। लेकिन गिरावट की स्थिति में निवेशक चिंतित हो जाते हैं और कई बार सेलिंग प्रेसर भी देखने को मिलता है।
इस हफ्ते के आंकड़ों ने साबित किया कि बाजार में स्थिरता भले ही दिखाई दे, लेकिन हर कंपनी अपनी स्ट्रैटेजी, नतीजों, और खबरों के आधार पर अपनी अलग कहानी लिखती है—कभी चमकती हुई, कभी फिसलती हुई।