सर्दियों के मौसम में छाती में बलगम जमना एक आम समस्या है, लेकिन जब यही बलगम सूखकर अंदर चिपक जाता है तो सांस लेने में भारीपन, सीने में जकड़न, दर्द और बार-बार खांसी जैसी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। यह स्थिति न सिर्फ शरीर को थका देती है, बल्कि रोजमर्रा के कामों को भी मुश्किल बना देती है। ऐसे समय में केवल दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय छाती में जमे सूखे बलगम को ढीला कर बाहर निकालने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं।
प्राकृतिक तरीकों से बलगम को पिघलाने के लिए सबसे असरदार उपायों में भाप लेना प्रमुख माना जाता है। गर्म पानी की भाप सीधी सांस की नलियों तक पहुंचती है और वहां जमा गाढ़े कफ को नरम कर देती है, जिससे वह खांसी के साथ आसानी से बाहर निकल जाता है। अगर भाप में थोड़ा सा अजवाइन या नीलगिरी का तेल मिला लिया जाए तो इसका असर और भी तेज हो जाता है और नाक से लेकर छाती तक जमी रुकावट धीरे-धीरे साफ होने लगती है।
हल्दी वाला गरम दूध भी सूखे कफ के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। हल्दी में मौजूद प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करते हैं और अंदर जमे बलगम को ढीला करने में मदद करते हैं। रात में सोने से पहले हल्का गरम हल्दी दूध पीने से गले की खराश, सीने की जकड़न और अंदरूनी सूजन में राहत मिलती है, जिससे सांस लेना आसान होने लगता है।
अदरक और शहद का मिश्रण भी छाती में जमे बलगम को बाहर निकालने का एक असरदार उपाय है। अदरक कफ को खोलने में मदद करता है, जबकि शहद गले को राहत देता है और खांसी को शांत करता है। दिन में दो बार अदरक के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से सूखा बलगम धीरे-धीरे पिघलने लगता है और सीने का बोझ हल्का महसूस होने लगता है।
गर्म पानी में अजवाइन डालकर बनाया गया काढ़ा भी बलगम को ढीला करने में बहुत उपयोगी माना जाता है। अजवाइन के प्राकृतिक तत्व सांस की नलियों में जमे कफ को बाहर निकालने में सहायता करते हैं। जब यह काढ़ा गर्म-गर्म पिया जाता है, तो छाती के अंदर जमी जकड़न ढीली पड़ने लगती है और फेफड़ों पर पड़ा दबाव कम होने लगता है। साथ ही यह पाचन को भी बेहतर बनाता है, जिससे कफ दोबारा जल्दी जमा नहीं होता।
सरसों के तेल से छाती पर हल्की मालिश करना भी एक पुराना और कारगर घरेलू उपाय माना जाता है। हल्का गरम सरसों का तेल छाती पर लगाने से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और अंदर जमे सूखे कफ को ढीला करने में मदद मिलती है। अगर इसमें लहसुन की कली डालकर तेल को पकाया जाए तो इसकी गर्म तासीर और भी प्रभावी हो जाती है। यह तरीका बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए सुरक्षित माना जाता है।
हालांकि ये सभी उपाय प्राकृतिक और घरेलू हैं, लेकिन अगर छाती में बलगम लंबे समय तक जमा रहे, बुखार, सीने में तेज दर्द या सांस लेने में अधिक परेशानी हो, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है। घरेलू उपाय राहत दिलाने में मदद करते हैं, लेकिन गंभीर स्थिति में चिकित्सकीय सलाह सबसे जरूरी होती है।