होम लोन लेने वालों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा हाल ही में रेपो रेट में 0.25% की कटौती के बाद अब इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलना शुरू हो गया है। इसी क्रम में पंजाब नेशनल बैंक, HDFC बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र समेत कुल छह बड़े बैंकों ने अपनी होम लोन की ब्याज दरों में 0.25% तक की कटौती कर दी है। इस कटौती के बाद अब होम लोन की शुरुआती ब्याज दर घटकर 7.10% के निचले स्तर तक पहुंच गई है, जो बीते कई सालों में सबसे आकर्षक स्तरों में से एक माना जा रहा है।
दरअसल, रिज़र्व बैंक ने 5 दिसंबर को रेपो रेट को 5.50% से घटाकर 5.25% कर दिया था। इसके बाद बैंकों की फंडिंग लागत में कमी आई और अब उसी का फायदा वे सस्ते लोन के रूप में अपने ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं। इस बदलाव का असर नए होम लोन लेने वालों के साथ-साथ पहले से लोन ले चुके ग्राहकों पर भी देखने को मिलेगा, जिनके लोन फ्लोटिंग रेट से जुड़े हुए हैं।
हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि किसी व्यक्ति को होम लोन किस ब्याज दर पर मिलेगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है। इसमें सबसे अहम भूमिका क्रेडिट स्कोर की होती है, साथ ही लोन-टू-वैल्यू रेशियो, लोन की रकम और उसकी अवधि यानी टेन्योर भी ब्याज दर को प्रभावित करते हैं। मान लीजिए पहले किसी ग्राहक को 8% की दर से होम लोन मिल रहा था, तो 0.25% की कटौती के बाद उसकी नई ब्याज दर 7.75% के आसपास हो जाएगी। इसका सीधा असर मासिक ईएमआई पर पड़ेगा। अगर किसी ने 20 साल के लिए 20 लाख रुपये का लोन लिया है, तो उसकी ईएमआई करीब 310 रुपये तक कम हो सकती है। वहीं 20 साल की अवधि के लिए 30 लाख रुपये के लोन पर यह राहत लगभग 465 रुपये प्रति माह तक की हो सकती है। लंबे समय में यह बचत हजारों रुपये में बदल जाती है।
होम लोन लेते समय कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी होता है। कई बैंक तय समय से पहले लोन चुकाने यानी प्री-पेमेंट पर पेनल्टी लगाते हैं, क्योंकि इससे उन्हें मिलने वाला ब्याज कम हो जाता है। इसलिए लोन लेने से पहले इस शर्त को अच्छे से समझना जरूरी है। इसके अलावा क्रेडिट स्कोर का सीधा असर आपकी ब्याज दर पर पड़ता है। 300 से 900 के बीच आने वाला यह स्कोर जितना ज्यादा मजबूत होता है, बैंक उतनी ही कम ब्याज दर पर लोन देने को तैयार होते हैं। आमतौर पर 700 या उससे ऊपर का स्कोर बेहतर माना जाता है। समय पर ईएमआई और क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने से यह स्कोर मजबूत बना रहता है।
इसके साथ ही बैंकों के ऑफर्स पर भी नजर रखना जरूरी होता है। कई बार बैंक फेस्टिव सीजन या खास अभियानों के दौरान प्रोसेसिंग फीस में छूट, कम ब्याज दर या अन्य फायदे देते हैं। जल्दबाजी में लोन लेने के बजाय अगर अलग-अलग बैंकों की शर्तों और ऑफर्स की तुलना कर ली जाए, तो ग्राहक को ज्यादा फायदा मिल सकता है।
कुल मिलाकर, रेपो रेट में कटौती के बाद बैंकों द्वारा होम लोन को सस्ता करना घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है। कम ब्याज दरें न सिर्फ ईएमआई का बोझ घटाती हैं, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में भी नई तेजी ला सकती हैं। ऐसे में जो लोग आने वाले समय में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह सही मौका साबित हो सकता है।