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अब छात्र खुद डिज़ाइन करेंगे अपनी डिग्री, जम्मू-कश्मीर बन रहा देश को राह दिखाने वाला नया एजुकेशन मॉडल

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अमर उजाला के मंच पर शुरू हुए ‘एजुकेशन फॉर भारत 2025’ कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में भारतीय शिक्षा व्यवस्था के बदलते स्वरूप पर बेहद अहम चर्चा देखने को मिली। इस सत्र में जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर उमेश राय और एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज़ (AIU) की महासचिव पंकज मित्तल ने शिक्षा के भविष्य को लेकर ऐसा नजरिया रखा, जो आने वाले वर्षों में पूरे देश की एजुकेशन पॉलिसी की दिशा तय कर सकता है। वक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि अब वह दौर खत्म हो रहा है, जब छात्र मजबूरी में किसी तय ढांचे के तहत पढ़ाई करते थे। आने वाला समय छात्रों की पसंद, रुचि और पैशन का होगा, जहां वही तय करेंगे कि उन्हें क्या पढ़ना है और कैसे अपना करियर बनाना है।

जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उमेश राय ने इस दौरान एक बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि उनका संस्थान देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय बन गया है, जहां ‘डिज़ाइन योर डिग्री’ जैसी क्रांतिकारी पहल शुरू की गई है। इस मॉडल के तहत किसी भी विषय का छात्र अपनी रुचि के अनुसार अलग-अलग विषयों का संयोजन करके अपनी डिग्री खुद तैयार कर सकता है। उन्होंने कहा कि अब छात्रों का पैशन ही उनकी डिग्री तय करेगा। अगर कोई छात्र साइंस के साथ डिजाइन, मैनेजमेंट या टेक्नोलॉजी जोड़ना चाहता है, तो उसके लिए रास्ते खुले हैं। किसी विषय को लेकर अब किसी तरह की पाबंदी नहीं रहेगी।

प्रो. राय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर आज शिक्षा के क्षेत्र में पूरे देश को एक नई रोशनी दिखा रहा है। उनका मानना है कि शिक्षा को अब सिर्फ डिग्री तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सीधे रोजगार से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टीचिंग को ज्यादा ‘एम्प्लॉयबल’ बनाना होगा, यानी ऐसी पढ़ाई करानी होगी, जो छात्रों को सीधे नौकरी और स्वरोजगार से जोड़ सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अब वही ज्ञान और वही स्किल्स छात्रों तक पहुंचानी होंगी, जिनकी आज के बाजार और इंडस्ट्री में असली जरूरत है। शिक्षा को छात्रों की जिज्ञासा और व्यावहारिक जरूरतों के हिसाब से डिजाइन करना समय की मांग बन चुका है।

वहीं एआईयू की महासचिव पंकज मित्तल ने शिक्षा में छात्र की आज़ादी और स्वायत्तता पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू होने के बाद यह साफ हो चुका है कि अब छात्र ही यह तय करेगा कि उसे किस विश्वविद्यालय से पढ़ना है, क्या पढ़ना है और किस दिशा में अपना भविष्य बनाना है। संस्थान अब छात्रों पर अपनी शर्तें थोपने की स्थिति में नहीं रहेंगे। उन्होंने बताया कि एआईयू शुरू से ही एनईपी को गहराई से समझने और उसे जमीन पर लागू करने के लिए निरंतर काम कर रही है।

पंकज मित्तल ने यह भी कहा कि आने वाले समय में विश्वविद्यालयों की भूमिका पूरी तरह बदलने वाली है। अब सवाल यह नहीं रहेगा कि यूनिवर्सिटी क्या पढ़ा रही है, बल्कि यह होगा कि छात्र क्या सीखना चाहता है। संस्थानों को उसी के अनुसार खुद को ढालना होगा। शिक्षा का केंद्र अब संस्थान नहीं, छात्र बनने जा रहा है।

इस सत्र की सबसे बड़ी खास बात यह रही कि दोनों विशेषज्ञों ने एक सुर में माना कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था अब एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। आने वाले वर्षों में डिग्री, डिप्लोमा और करियर के पारंपरिक ढांचे टूटेंगे और उनकी जगह स्किल, इनोवेशन, पैशन और फील्ड-आधारित लर्निंग लेगी। ‘डिज़ाइन योर डिग्री’ जैसे प्रयोग इस बात का संकेत हैं कि अब शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि छात्रों को उनकी रुचि के अनुसार जिंदगी बनाने का पूरा अधिकार देगी।

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