शुरुआती कमजोरी के बाद बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने तेजी की वापसी की और निवेशकों को राहत की सांस मिली। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बीच कारोबार की शुरुआत हल्की गिरावट के साथ हुई थी, लेकिन कुछ ही देर में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। इसका असर यह रहा कि Sensex करीब 211.62 अंकों की बढ़त के साथ 84,878 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं Nifty भी शुरुआती लाल निशान से बाहर निकलकर 57 अंकों की मजबूती के साथ 25,896 के स्तर तक पहुंच गया। इस तेजी से साफ संकेत मिला कि शुरुआती हिचकिचाहट के बाद निवेशकों का भरोसा दोबारा लौटता दिखा।
आज के कारोबार में कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों में अच्छी मजबूती देखने को मिली। Hindalco, Trent, Tata Steel और Jio Financial जैसे दिग्गज शेयरों में तेज खरीदारी हुई, जिससे बाजार को सहारा मिला। दूसरी ओर Titan, Bajaj Finance और TCS जैसे बड़े नामों पर दबाव बना रहा। इससे यह साफ हो गया कि फिलहाल बाजार सेक्टर के हिसाब से बंटा हुआ चल रहा है, जहां कुछ क्षेत्रों में मजबूती बनी हुई है तो कुछ में कमजोरी का माहौल है।
ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो यहां दबाव ज्यादा नजर आया। BSE पर इस दौरान कुल 3,096 शेयरों में कारोबार हो रहा था, जिनमें से 2,003 शेयर बढ़त में थे, जबकि 954 शेयर गिरावट में बने रहे। करीब 32 शेयर अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर तक फिसल गए, जो यह संकेत देता है कि छोटे और मझोले शेयरों में अभी भी कमजोरी बनी हुई है। इसी बीच Adani Green में एक बड़ा ब्लॉक डील सौदा देखने को मिला, जहां करीब 2.24 करोड़ शेयर एकसाथ ट्रेड हुए। इससे स्टॉक में अस्थायी उतार-चढ़ाव जरूर बढ़ा, लेकिन बड़े निवेशकों की दिलचस्पी भी साफ दिखाई दी।
बाजार का कुल मार्केट कैप लगभग 4,66.86 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गया है, जो यह दर्शाता है कि वैल्यूएशन के लिहाज से भारतीय शेयर बाजार अब भी मजबूत स्थिति में बना हुआ है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात पूरी तरह आसान नहीं हैं। विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे ब्रॉडर मार्केट पर दबाव और गहरा गया है। इसके अलावा कई शेयर पहले ही काफी महंगे स्तर पर पहुंच चुके थे, इसलिए वहां मुनाफावसूली भी तेज हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कुछ ऐसे संकेत हैं जो निवेशकों की भावनाओं को कमजोर कर रहे हैं। अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते में हो रही देरी, साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप का भारत पर ‘चावल डंपिंग’ से जुड़ा बयान भी बाजार की धारणा पर नकारात्मक असर डालता दिख रहा है। इन वजहों से निवेशक फिलहाल पूरी तरह जोखिम लेने से थोड़ा बचते नजर आ रहे हैं।
इसके बावजूद बाजार के लिए कुछ सकारात्मक संकेत भी मौजूद हैं। भारत की आर्थिक वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है, आने वाले समय में कंपनियों के मुनाफे में सुधार की उम्मीद है और कई बड़ी कंपनियों के शेयर अब पहले के मुकाबले बेहतर वैल्यूएशन पर उपलब्ध हो गए हैं। वहीं महंगाई के बढ़ने की संभावना से नॉमिनल जीडीपी और कॉरपोरेट अर्निंग्स में भी इजाफा होने के संकेत मिल रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय में फिलहाल सतर्कता ही सबसे बेहतर रणनीति मानी जा रही है। जब तक फेडरल रिजर्व की बैठक से कोई साफ संकेत नहीं मिल जाते, तब तक निफ्टी और बैंक निफ्टी में आने वाली तेजी पर बेचने की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। वहीं लंबे समय के निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान बनाए रखने की बात कही जा रही है। कुल मिलाकर बाजार में उतार-चढ़ाव जरूर बना हुआ है, लेकिन बुनियादी मजबूती अभी कायम है, इसलिए सोच-समझकर कदम बढ़ाना ही इस वक्त सबसे समझदारी भरा फैसला माना जा रहा है।