चांदी ने दिसंबर की शुरुआत में ही ऐसा रफ्तार पकड़ी कि बाजार दंग रह गया। लगातार तीसरे दिन बेतहाशा बढ़त के बाद 12 दिसंबर को चांदी ₹1,92,781 प्रति किलो के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई। तीन दिनों में करीब ₹13,888 की बढ़त बताती है कि इस समय मेटल मार्केट में चांदी की मांग कितनी तेज़ और आक्रामक बनी हुई है। दूसरी ओर सोना भी पीछे नहीं रहा—सिर्फ एक दिन में ₹1,973 उछलकर यह ₹1,30,569 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो इसके रिकॉर्ड स्तर के बेहद करीब है।
IBJA की दरों में GST, मेकिंग चार्ज या ज्वेलर्स मार्जिन नहीं शामिल होता, इसलिए शहरों में वास्तविक रेट थोड़े अलग दिखाई देते हैं। लेकिन यही बेस रेट RBI से लेकर गोल्ड लोन तक, कई वित्तीय फैसलों का आधार बनते हैं।
इस साल सोने और चांदी की असली रफ्तार तो सालभर के चार्ट में दिखती है—सोना जहां 54,407 रुपए प्रति 10 ग्राम महंगा हुआ है, वहीं चांदी पूरे 1,06,764 रुपए प्रति किलो चढ़ गई है। इतनी तेज़ बढ़त मेटल मार्केट के लिए भी दुर्लभ है।
आख़िर चांदी में यह आग लगी क्यों?
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के मुताबिक चांदी अब सिर्फ एक निवेश धातु नहीं, बल्कि उद्योगों के लिए अनिवार्य कच्चा माल बन चुकी है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, सोलर पैनल्स और कई हाई-टेक सेक्टर चांदी पर निर्भर हैं। यही वजह है कि उत्पादन से तेज़ी से बढ़ती मांग ने वैश्विक बाज़ार में इसका दबदबा बढ़ा दिया है।
इसके साथ ही अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की संभावित ट्रेड नीतियों को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने बाजार को और सतर्क कर दिया है। चांदी पर टैरिफ की संभावना से अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स ने बड़े पैमाने पर स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है। इस जमाखोरी से ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बढ़ा और बाकी देशों में कमी गहराने लगी। आपूर्ति घटने के साथ कीमतों में तेज़ उछाल लगभग तय था।
मैन्युफैक्चरर्स का एक और डर—कहीं उत्पादन बाधित न हो जाए। इसलिए वे हर हाल में पर्याप्त चांदी सुरक्षित कर लेना चाहते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर कीमतों में लगातार आग लगी हुई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह रुझान आगे भी जारी रहेगा।
क्या चांदी 2 लाख के पार जाएगी?
केडिया एडवाइजरी के अजय केडिया का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती प्रवृत्ति ने सोने–चांदी दोनों को सपोर्ट दिया है। उनके अनुमान में सोना इस साल ₹1,35,000 प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है और चांदी 2 लाख रुपए किलो का स्तर पार कर सकती है। यानी रैली अभी थमी नहीं है—रफ्तार और तेज़ हो सकती है।
सोना खरीद रहे हैं? इन दो बातों को हमेशा याद रखें
पहली—हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। हॉलमार्किंग यह साबित करती है कि सोना कितने कैरेट का है और शुद्धता वास्तविक है।
दूसरी—रेट हमेशा क्रॉस चेक करें। अलग-अलग कैरेट में कीमतें अलग होती हैं, और ज्वेलर पर निर्भर करती हैं कि उसने स्टॉक कब और किस दाम पर खरीदा था।
शहरों में गोल्ड रेट अलग क्यों होते हैं?
सोने के रेट को कई कारक प्रभावित करते हैं—ट्रांसपोर्टेशन लागत, अलग-अलग राज्यों में डिमांड, लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन का प्राइसिंग मॉडल और ज्वेलर्स की खरीद कीमत। जहां डिमांड ज्यादा और खरीदारी बल्क में होती है, वहां रेट थोड़ा कम मिल जाता है, वहीं छोटे शहरों में यह ज्यादा दिखता है।
इन सारी उथल-पुथल के बीच एक बात साफ़ है—कीमती धातुओं का बाज़ार इस समय बेहद सक्रिय और संवेदनशील है। चांदी की रफ्तार जहाँ नए इतिहास लिख रही है, वहीं सोना भी निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। आने वाले महीनों में यह चमक और तेज़ हो सकती है—लेकिन हर निवेशक के लिए समझदारी, टाइमिंग और जानकारी सबसे बड़ी कुंजी है।