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November CPI: खुदरा महंगाई 0.71% पर सीमित, सब्जियों की कीमतों में 22% की गिरावट से राहत

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नवंबर महीने में भारत की खुदरा महंगाई में हल्की बढ़ोतरी जरूर दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद यह लगातार तीसरे महीने भारतीय रिज़र्व बैंक के तय 4 प्रतिशत लक्ष्य और उसके ±2 प्रतिशत के टॉलरेंस बैंड से काफी नीचे बनी हुई है। सांख्यिकी मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI 0.71 प्रतिशत रहा। यह आंकड़ा लगभग वही है, जिसका अनुमान बाजार विशेषज्ञ पहले से जता रहे थे। ब्लूमबर्ग के विश्लेषकों ने भी महंगाई के 0.7 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान लगाया था।

इससे पहले अक्टूबर में खुदरा महंगाई 0.25 प्रतिशत के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई थी, जबकि नवंबर 2024 में यही आंकड़ा 5.48 प्रतिशत था। यानी साल भर में महंगाई में भारी गिरावट देखने को मिली है। इसी ट्रेंड को देखते हुए रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने महंगाई अनुमान को पहले 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया है। लगातार कम महंगाई यह संकेत देती है कि फिलहाल कीमतों पर दबाव काफी हद तक नियंत्रण में है।

हालांकि नवंबर में CPI में जो हल्की बढ़त दर्ज हुई, उसके पीछे कुछ चुनिंदा खाद्य पदार्थों और ईंधन से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों में मामूली उछाल रहा। सब्ज़ियों, अंडों, मांस-मछली, मसालों के साथ-साथ ईंधन और प्रकाश श्रेणी में भी सीमित बढ़ोतरी देखने को मिली। इसके बावजूद कुल खाद्य टोकरी में गिरावट का असर इतना मजबूत रहा कि महंगाई बेहद निचले स्तर पर बनी रही।

खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतों में नवंबर के दौरान औसतन 2.78 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट अक्टूबर के मुकाबले थोड़ी कम जरूर रही, लेकिन फिर भी उपभोक्ताओं के लिए राहत देने वाली है। अच्छी फसल, बेहतर सप्लाई और बाजार में उपलब्धता की वजह से ज्यादातर खाद्य वस्तुओं की कीमतें काबू में रहीं। खास तौर पर सब्ज़ियों की कीमतों में सालाना आधार पर करीब 22 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसने कुल महंगाई को नीचे बनाए रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।

दालों की कीमतों में भी करीब 15 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट बनी रही, जबकि तेल और वसा, दूध, अंडा और मांस-मछली जैसी श्रेणियों में कुछ बढ़त देखने को मिली। अनाज की महंगाई लगभग स्थिर रही, जो यह दिखाता है कि खाद्य सुरक्षा और सप्लाई चेन फिलहाल मजबूत स्थिति में है। चीनी की कीमतों में भी सीमित बढ़ोतरी दर्ज हुई, जबकि मसालों में महंगाई पहले के मुकाबले कुछ नरम पड़ी।

खाद्य वस्तुओं के अलावा अन्य श्रेणियों की बात करें तो हाउसिंग महंगाई लगभग 3 प्रतिशत के आसपास स्थिर रही। कपड़ा और फुटवियर की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली, वहीं ईंधन और प्रकाश श्रेणी में भी हल्का उछाल दर्ज किया गया। इसके बावजूद कोर महंगाई, जिसमें खाद्य और ईंधन को शामिल नहीं किया जाता, 4.4 प्रतिशत पर स्थिर बनी रही, जो यह बताती है कि मांग से जुड़ा दबाव अभी भी सीमित है।

कुल मिलाकर बड़ी तस्वीर यही दिखाती है कि नवंबर में भले ही CPI में थोड़ा सा उछाल आया हो, लेकिन महंगाई अब भी बेहद निचले और आरामदायक स्तर पर है। यह स्थिति रिज़र्व बैंक के लिए राहत भरी है और आगे चलकर ब्याज दरों से जुड़े फैसलों पर इसका असर पड़ सकता है। मजबूत कृषि उत्पादन, पर्याप्त सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नरम होती कीमतों ने महंगाई को काबू में रखने में अहम भूमिका निभाई है। अगर यही रुझान आगे भी बना रहता है, तो आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ नीति निर्माताओं के लिए भी यह एक सकारात्मक संकेत माना जाएगा।

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