कुट्टू डोसा सिर्फ व्रत या उपवास तक सीमित रहने वाली डिश नहीं है, बल्कि इसे आप रोज़मर्रा के नाश्ते या हल्के खाने के तौर पर भी मज़े से खा सकते हैं। अगर आप कुट्टू की पूरी या पकौड़ों के वही पुराने स्वाद से ऊब चुके हैं, तो कुट्टू डोसा आपके लिए एक नया और दिलचस्प विकल्प है। यह न केवल जल्दी बन जाता है, बल्कि इसका कुरकुरा टेक्सचर और हल्का स्वाद इसे साउथ इंडियन डोसे का बेहतरीन देसी विकल्प बना देता है।
कुट्टू का आटा फाइबर और ज़रूरी मिनरल्स से भरपूर होता है, जिससे पेट देर तक भरा रहता है और पाचन भी हल्का बना रहता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि डोसा बनाने के लिए किसी तरह की फर्मेंटेशन प्रक्रिया की ज़रूरत नहीं पड़ती। सही तरीके से तैयार किया गया बैटर आपको सुनहरा, पतला और कुरकुरा डोसा देता है, जिसे हर उम्र के लोग पसंद करते हैं।
कुट्टू डोसा बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में कुट्टू का आटा लें और उसमें सेंधा नमक, काली मिर्च पाउडर, जीरा, बारीक कटी हरी मिर्च और हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिला लें। अब धीरे-धीरे पानी डालते हुए एक स्मूद और पतला बैटर तैयार करें। बैटर का कंसिस्टेंसी बहुत ज़्यादा गाढ़ा नहीं होना चाहिए, क्योंकि पतला बैटर ही डोसे को कुरकुरा बनाता है। बैटर को लगभग 10 से 15 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि आटा अच्छी तरह सेट हो जाए।
इसके बाद नॉन-स्टिक या लोहे का तवा मध्यम आंच पर गर्म करें और हल्का सा घी या तेल लगाएं। तवा बहुत ज़्यादा गर्म न हो, इसका ध्यान रखें, वरना डोसा फैलाने में परेशानी हो सकती है। अब तवे के बीच में एक कलछी बैटर डालें और गोलाई में घुमाते हुए पतला फैलाएं। डोसे को धीमी से मध्यम आंच पर पकने दें। जब इसके किनारे सुनहरे होने लगें, तब ऊपर से थोड़ा घी डालें और पलटकर दूसरी तरफ भी हल्का ब्राउन होने तक सेक लें।
जैसे ही डोसा अच्छी तरह कुरकुरा हो जाए, गैस बंद करें और उसे तवे से उतार लें। गरमागरम कुट्टू डोसा को व्रत की मूंगफली की चटनी, नारियल चटनी या सादे दही के साथ परोसें। स्वाद और पोषण से भरपूर यह डिश न सिर्फ व्रत के दिनों में, बल्कि आम दिनों में भी आपके खाने की थाली को खास बना देगी।