15 दिसंबर को सोने की कीमतों ने इतिहास रच दिया। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक 10 ग्राम सोना 732 रुपये की तेजी के साथ ₹1,33,442 पर पहुंच गया, जो अब तक का ऑलटाइम हाई है। इससे पहले सोना ₹1,32,710 के स्तर पर था। दूसरी ओर चांदी में आज कमजोरी देखने को मिली और इसका भाव 2,958 रुपये गिरकर ₹1,92,222 प्रति किलो रह गया। हालांकि यह याद दिलाना जरूरी है कि चांदी इससे पहले ₹1,95,180 प्रति किलो के ऑलटाइम हाई तक पहुंच चुकी है।
शहरों के हिसाब से सोने-चांदी के दाम अलग-अलग दिखने की एक बड़ी वजह टैक्स और चार्जेस हैं। IBJA द्वारा जारी कीमतों में 3 प्रतिशत जीएसटी, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता, इसी कारण स्थानीय बाजारों में रेट अलग नजर आते हैं। इन्हीं रेट्स का इस्तेमाल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सोवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय करने में करता है और कई बैंक गोल्ड लोन के लिए भी इन्हें आधार मानते हैं।
पूरे साल की तस्वीर देखें तो 2025 सोने और चांदी दोनों के लिए असाधारण रहा है। 31 दिसंबर 2024 को 24 कैरेट सोना ₹76,162 प्रति 10 ग्राम था, जो अब बढ़कर ₹1,33,442 तक पहुंच गया है। यानी इस साल सोना कुल ₹57,280 महंगा हो चुका है। चांदी की तेजी और भी चौंकाने वाली रही है। बीते साल के आखिरी दिन चांदी ₹86,017 प्रति किलो थी, जो अब ₹1,92,222 पर पहुंच गई है। इस तरह चांदी ने एक साल में ₹1,06,205 की छलांग लगाई है।
सोने में आई इस जबरदस्त तेजी के पीछे दो बड़े कारण माने जा रहे हैं। पहला वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव है। रूस-यूक्रेन युद्ध और दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानकर उसमें पैसा लगा रहे हैं। दूसरा बड़ा कारण सेंट्रल बैंकों की आक्रामक खरीदारी है। चीन जैसे देश अपने रिजर्व बैंक में लगातार सोना जोड़ रहे हैं और सालभर में 900 टन से ज्यादा की खरीदारी होने से कीमतों को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।
महंगे होते सोने के बीच निवेशकों और ग्राहकों के लिए सतर्कता भी जरूरी हो गई है। सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही लेना चाहिए, जिससे उसकी शुद्धता और कैरेट की पुष्टि हो सके। साथ ही खरीद के दिन का भाव अलग-अलग भरोसेमंद स्रोतों से जरूर जांचना चाहिए, क्योंकि 24, 22 और 18 कैरेट सोने की कीमतों में बड़ा अंतर होता है।
कुल मिलाकर, 2025 में सोना और चांदी सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि निवेश और सुरक्षित संपत्ति के रूप में उन्होंने नया इतिहास रच दिया है। कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह वैश्विक हालात और सेंट्रल बैंकों की रणनीति पर काफी हद तक निर्भर करेगा।