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धान खरीदी पर विपक्ष का स्थगन स्वीकार: महंत के प्रस्ताव पर डॉ. रमन की मंजूरी, भूपेश बघेल ने खोला मोर्चा

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रायपुर में चल रहे छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीत सत्र के दूसरे दिन धान खरीदी का मुद्दा सदन के केंद्र में आ गया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने विपक्ष की ओर से लाए गए स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिसके साथ ही सदन में धान खरीदी को लेकर तुरंत चर्चा शुरू हो गई। इस फैसले के बाद माहौल गर्म हो गया और सरकार तथा विपक्ष आमने-सामने नजर आए।

स्थगन प्रस्ताव नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने रखा था। उन्होंने सदन में कहा कि प्रदेश में धान खरीदी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। किसानों को न तो समय पर खरीदी का लाभ मिल पा रहा है और न ही भुगतान की प्रक्रिया सुचारु है। महंत ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि सरकार जानबूझकर अव्यवस्था फैला रही है या फिर धान खरीदना ही नहीं चाहती। उन्होंने मांग की कि इस गंभीर विषय पर सदन की कार्यवाही स्थगित कर विस्तृत चर्चा कराई जाए।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रस्ताव को ग्राह्य मानते हुए विपक्ष की मांग स्वीकार कर ली। इसके बाद धान खरीदी पर चर्चा की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की। उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा सरकार किसानों से धान खरीदने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों का रकबा घट रहा है, तकनीकी अव्यवस्थाओं के कारण पोर्टल बार-बार बंद हो जाता है और नेटवर्क की समस्या के चलते किसान भटकने को मजबूर हैं। भूपेश बघेल ने यहां तक कहा कि प्रदेश में एक परेशान किसान ने आत्मघाती कदम उठाया, जो सरकार की नीतियों और व्यवस्था की असफलता को दर्शाता है।

चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि धान खरीदी को लेकर पूरे प्रदेश में एकरूपता नहीं है और हर जिले में किसानों को अलग-अलग नियमों से जूझना पड़ रहा है। किसानों को अपने ही राज्य में धान बेचने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।

धान खरीदी पर स्थगन प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद शुरू हुई यह बहस साफ संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह सियासी तापमान को और बढ़ाएगा। किसानों की समस्याओं को लेकर विपक्ष जहां सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है, वहीं सरकार पर अब सदन के भीतर ठोस जवाब देने का दबाव बढ़ गया है।

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